फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नागों का जन्म और उनसे जुड़ा यह रहस्य चौंका देगा

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के अलग-अलग राज्यों में अनेकों प्रकार से नाग देवता की पूजा-आराधना की जाती है।
विज्ञापन


पौराणिक मान्यता के अनुसार वर्तमान श्रीश्वेतवाराह कल्प में सृष्टि सृजन के आरंभ में ही एकबार किसी कारणवश ब्रह्मा जी को बड़ा क्रोध आया जिनके परिणामस्वरूप उनके आंसुओं की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं और उनकी परिणति नागों के रूप में हुई, इन नागों में प्रमुख रूप से अनन्त, कुलिक, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, और शंखपाल आदि प्रमुख हैं।

नागों की इन शक्तियों को नहीं जानते होंगे

अपना पुत्र मानते हुए ब्रह्मा जी ने इन्हें ग्रहों के बराबर ही शक्तिशाली बनाया। इनमें अनंतनाग सूर्य के, वासुकि चंद्रमा के, तक्षक मंगल के, कर्कोटक बुध के, पद्म बृहस्पति के, महापद्म शुक्र के, कुलिक और शंखपाल शनि ग्रह के रूप हैं!

ये सभी नाग भी सृष्टि संचालन में ग्रहों के समान ही भूमिका निभाते हैं। इनसे गणेश और रूद्र यज्ञोपवीत के रूप में, महादेव श्रृंगार के रूप में तथा विष्णु जी शैय्या रूप में सेवा लेते हैं।

ये शेषनाग रूप में स्वयं पृथ्वी को अपने फन पर धारण करते हैं। वैदिक ज्योतिष में राहु को काल और केतु को सर्प माना गया है।

अतः नागों की पूजा करने से मनुष्य की जन्म कुंडली में राहु-केतु जन्य सभी दोष तो शांत होते ही हैं, इनकी पूजा से कालसर्प दोष और विषधारी जीवो के दंश का भय नहीं रहता। परिवार में वंश वृद्धि, सुख-शांति के लिए नए घर का निर्माण करते समय नींव में चांदी का बना नाग-नागिन का जोड़ा रखा जाता है।

विज्ञापन

गाय के गोबर से नाग क्यों बनाते हैं?

ग्रामीण अंचलों में नागपंचमी के ही दिन लोग अपने-अपने दरवाजे पर गाय के गोबर से सर्पों की आकृति बनाते हैं और नागों की पूजा करते हैं। नाग लक्ष्मी के अनुचर के रूप में जाने जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जहां नागदेवता का वास रहता है, वहां लक्ष्मी जरुर रहतीं हैं।

इनकी पूजा अर्चना से आर्थिक तंगी और वंश वृद्धि में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है। आज नाग पंचमी को आप इस मंत्र के साथ नाग का पूजन करें।

नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वी मनु! ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः। यानी जो नाग, पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग, सूर्य की किरणों, सरोवरों, कूप तथा तालाब आदि में निवास करते हैं, वे सब हम पर प्रसन्न हों, हम उनको बार-बार नमस्कार करते हैं । इसके लिए शिवमंदिर में प्राणप्रतिष्ठित शिवलिंग पर स्थापित नाग की पूजा भी कर सकते हैं।
पढ़ें, जानिए नागिन कब और कैसे गर्भ धारण करती है?

पढ़ें,नागों का जन्म और उनसे जुड़ा यह रहस्य चौंका देगा

पढ़ें, नाग को दूध क्यों चढ़ाते हैं, यह परंपरा कैसे शुरू हुई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें