पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलने वाला माघ स्नान पुण्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है। पंचांग के अनुसार,6 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी, जो 7 जनवरी को सुबह 4 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार 6 जनवरी पूर्णिमा से ही माघ स्नान प्रारंभ हो जाएगा। माघ मास का स्नान-व्रत धारण करने वाले साधक इसी तिथि से कल्पवास शुरू करते है,जिसकी पूर्णता माघी पूर्णिमा पर होती है।
धार्मिक महत्व
ब्रह्मा,विष्णु,महेश,आदित्य,मरुदगण तथा अन्य सभी देवी-देवता माघ में संगम स्नान करते है ।मान्यता है कि प्रयाग में माघ मास में तीन बार स्नान करने का फल दस हज़ारअश्वमेघ यज्ञ से भी ज्यादा होता है। पूरे महीने माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है तथा उन्हें सुख-सौभाग्य,धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है। यदि सकामभाव से माघ स्नान किया जाय तो उससे मनोवांछित फल की सिद्धि होती है और निष्काम भाव से स्नान आदि करने पर वह मोक्ष देने वाला होता है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। मान्यता है कि इन दिनों में प्रयागराज में अनेक तीर्थों का समागम होता है इसलिए जो प्रयाग या अन्य पवित्र नदियों में भी भक्तिभाव से स्नान करते है वह अनेकों पाप और कष्टों से मुक्त होकर स्वर्गलोक में स्थान पाते हैं। श्री रामचरित्र मानस के बालखण्ड में लिखा है-'माघ मकर गति रवि जब होई ,तीरथपतिहिं आव सब कोई !!'धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को सदगति दिलाने हेतु मार्कण्डेय ऋषि के सुझाव पर कल्पवास किया था। गौतमऋषि द्वारा शापित इंद्रदेव को भी माघ स्नान के कारण श्राप से मुक्ति मिली थी ।माघ मास में जो पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है ,जिससे उसका शरीर निरोगी और आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न हो जाता है।
ये हैं नियम
पदम् पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास की पूर्ण व्यवस्था का वर्णन किया है। उनके अनुसार कल्पवासी को सत्य,अहिंसा,संयम,दया ब्रह्मचर्य,व्यसनों का त्याग,पिंडदान,यथाशक्ति दान,भूमि शयन जैसे नियमों का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान धर्म के दस अंगों का पालन किया जाना आवश्यक है। मनु स्मृति के अनुसार दस धर्म हैं-धैर्य,क्षमा,स्वार्थपरता का त्याग,चोरी न करना,शारीरिक पवित्रता,इन्द्रियनिग्रह,बुद्धिमता,विद्या,सत्यवचन और अहिंसा। शास्त्रों के अनुसार माघ स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व आकाश जब तारे निकले हुए हों तब माना गया है। इस मास में तिल,गुड़ और कंबल के दान का विशेष महत्त्व माना गया है।
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