क्या गिरिराज जी को घर लाना सही है ?
गर्ग संहिता में कई विद्वानों के अनुसार कभी भी गिरिराज जी को घर लेकर नहीं आना चाहिए। इन्हें वृंदावन का मुकुट माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार राधा रानी गिरिराज पर्वत के बिना नहीं रह सकती है। कई कथाओं से पता चलता है कि धरती पर जन्म लेने से पहले राधा रानी ने कृष्ण जी से कहा था कि, उन्हें धरती पर एक ऐसी जगह चाहिए, जहां अधिक शांति हो। इस वाक्य के बाद कृष्ण जी ने अपने हृदय की ओर देखा, जिसके बाद वहां से तेज पुंज निकला और फिर इसी से गोवर्धन पर्वत बना।
इस पर्वत की सुंदरता हर किसी का मन मोह लेती है। कुछ समय बीतने के बाद जब भगवान कृष्ण धरती लोक पर आने लगे, तो उन्होंने राधा रानी से साथ चलने के लिए कहा। उनकी बात का उत्तर देते हुए राधा रानी ने कहा कि वह वृंदावन यमुना और गोवर्धन के बिना कैसे रहेंगी। इसके बाद ही श्री कृष्ण ने 84 कोस में फैले बृज मंडल को धरती पर भेजा और गोवर्धन ने शाल्मल द्वीप में द्रोणाचल गिरी के यहां जन्म लिया था। इसके साथ ही गिरिराज पर्वत श्री कृष्ण को अति प्रिय है। इसलिए गिरिराज को कभी भी 84 कोसों के बाहर नहीं लेकर जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो उसे बुरे परिणामों का सामना करना पड़ता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है