फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Giriraj Parvat: मथुरा-वृंदावन से भूलकर भी न लाएं यह एक चीज, मिलेंगे अशुभ परिणाम

Mon, 13 May 2024 06:35 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Never Bring this Thing From Mathura Vrindavan: मथुरा-वृंदावन में श्री कृष्ण के विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं। मान्यता है कि अगर आप मथुरा वृंदावन जा रहे हैं तो गिरिराज यानी गोवर्धन पर्वत के दर्शन जरूर करना चाहिए। इसके बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहां पर भी हर दिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि गिरिराज को घर लाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। पर क्या वास्तव में ऐसा करना चाहिए?
विज्ञापन
मथुरा-वृंदावन से भूलकर भी न लाएं यह एक चीज - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Mathura-Vrindavan: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्म नगरी माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के अवतार हैं। मान्यता है कि कंस के अत्याचारों को खत्म करने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में जन्म लिया था। भगवान कृष्ण की कहानियां व लीलाओं का जिक्र मथुरा की गली-गली में सुनने को मिलता है। मथुरा-वृंदावन में कदम रखते ही सभी भक्त कृष्ण भक्ति में रम जाते हैं। यहां के कोने-कोने में उनसे जुड़ी कहानियां प्रचलित है। मथुरा-वृंदावन में आपको ऐसे कई पौराणिक मंदिर देखने को मिलेंगे, जिनका विशेष महत्व है। वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर भी इनमें से एक है। यहां भगवान कृष्ण दर्शन के लिए हर दिन हजारों की तादाद में भक्त आते हैं।

विज्ञापन

 

मथुरा-वृंदावन में श्री कृष्ण के विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं। मान्यता है कि अगर आप मथुरा वृंदावन जा रहे हैं तो गिरिराज यानी गोवर्धन पर्वत के दर्शन जरूर करना चाहिए। इसके बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहां पर भी हर दिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि गिरिराज को घर लाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। पर क्या वास्तव में ऐसा करना चाहिए? आइए इसके बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

विज्ञापन

क्या गिरिराज जी को घर लाना सही है ?
गर्ग संहिता में कई विद्वानों के अनुसार कभी भी गिरिराज जी को घर लेकर नहीं आना चाहिए। इन्हें वृंदावन का मुकुट माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार राधा रानी गिरिराज पर्वत के बिना नहीं रह सकती है। कई कथाओं से पता चलता है कि धरती पर जन्म लेने से पहले राधा रानी ने कृष्ण जी से कहा था कि, उन्हें धरती पर एक ऐसी जगह चाहिए, जहां अधिक शांति हो। इस वाक्य के बाद कृष्ण जी ने अपने हृदय की ओर देखा, जिसके बाद वहां से तेज पुंज निकला और फिर इसी से गोवर्धन पर्वत बना।

इस पर्वत की सुंदरता हर किसी का मन मोह लेती है। कुछ समय बीतने के बाद जब भगवान कृष्ण धरती लोक पर आने लगे, तो उन्होंने राधा रानी से साथ चलने के लिए कहा। उनकी बात का उत्तर देते हुए राधा रानी ने कहा कि वह वृंदावन यमुना और गोवर्धन के बिना कैसे रहेंगी। इसके बाद ही श्री कृष्ण ने 84 कोस में फैले बृज मंडल को धरती पर भेजा और गोवर्धन ने शाल्मल द्वीप में द्रोणाचल गिरी के यहां जन्म लिया था। इसके साथ ही गिरिराज पर्वत श्री कृष्ण को अति प्रिय है। इसलिए गिरिराज को कभी भी 84 कोसों के बाहर नहीं लेकर जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो उसे बुरे परिणामों का सामना करना पड़ता है।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें