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Dev Deepawali 2021: आज है देव दिवाली, जानिए क्या है इसका धार्मिक महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 19 Nov 2021 08:44 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

देव दीपावली का धार्मिक महत्व इस विश्वास में निहित है कि इस दिन देवी और देवता गंगा नदी में पवित्र स्नान करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पवित्र नदी का पूरा घाट देवताओं और देवी गंगा नदी के सम्मान में लाखों छोटे मिट्टी के दीपक (दीया) से सुसज्जित किया जाता है। आइए जानते हैं क्या देव दीपवाली का धार्मिक महत्व और इसकी पूजा विधि। 
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dev diwali
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विस्तार
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आज यानि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपवाली का पर्व मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता दिवाली मनाते हैं। इस दिन देवता पृथ्वी पर आकार दिवाली मनाते हैं। मुख्य रूप से यह पर्व वाराणसी में गंगा नदी के तट पर मनाया जाता है। यह दीवाली उत्सव के अंत के साथ-साथ तुलसी विवाह के अनुष्ठान का समापन करती है। देव दीपावली का धार्मिक महत्व इस विश्वास में निहित है कि इस दिन देवी और देवता गंगा नदी में पवित्र स्नान करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पवित्र नदी का पूरा घाट देवताओं और देवी गंगा नदी के सम्मान में लाखों छोटे मिट्टी के दीपक (दीया) से सुसज्जित किया जाता है। आइए जानते हैं क्या देव दीपवाली का धार्मिक महत्व और इसकी पूजा विधि-

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dev diwali - फोटो : Instagram
देव दिवाली का धार्मिक महत्व 

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा–यमुना के घाट पर दीपावली मनाई जाती है। इस दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन नदियों में दीपदान करने से लंबी आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत और पूजन करने का विधान है। इस दिन तुलसी विवाह के समारोह का समापन होता है। इस दिन तुलसी पूजन करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

देव दीवाली 2021
देव दिवाली शुभ मुहूर्त 

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 18 नवंबर, गुरुवार दोपहर 12 बजे   
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 19 नवंबर, शुक्रवार दोपहर 02:26 मिनट ।
प्रदोष काल मुहूर्त: 18 नवंबर सायं 05:09 से 07:47 मिनट तक 
पूजा अवधि: 2 घंटे 38 मिनट
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देव दीपावली 2021 - फोटो : prayagraj
देव दिवाली पूजा विधि 
  • देव दीपावली के दिन सूर्य उगने से पूर्व उठकर गंगा स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। अगर गंगा स्नन करना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें।
  • इसके बाद भगवान गणेश, फिर शिव शंकर और भगवान विष्णु की विधिवत् पूजा करनी चाहिए।
  • शाम के समय भगवान शिव की फिर से पूजा करें। उन्हें फूल, घी, नैवेद्य और बेलपत्र अर्पित करें।
  • इसके बाद इन मंत्रों का जाप करें- ॐ नम: शिवाय’, ॐ हौं जूं सः, ॐ भूर्भुवः स्वः, ॐ त्र्यम्बेकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धूनान् मृत्योवर्मुक्षीय मामृतात्,ॐ स्वः भुवः भूः, ॐ सः जूं हौं ॐ
  • इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, नैवेद्य, पीले वस्त्र और पीली मिठाई अर्पित करें। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने मतस्यावतार लिया था।
  • अब इन मंत्रों का जाप करें-ॐ नमो नारायण नम:,नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युगधारिणे नम: ।।
  • इन मंत्रों के जाप के बाद भगवान शिव और विष्णु को धूप-दीप दिखाकर उनकी आरती उतारें।
  • तुलसी जी के पास भी दीपक जलाएं।
  • अगर संभव हो तो गंगा घाट जाकर दीपक जलाएं। अगर गंगा घाट जाना संभव न हो तो घर के अंदर और बाहर दीपक जलाएं।
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