राधा कृष्ण की प्रेम कहानी और उनकी लीला युगों युगों से भक्तों को आनंदित करती आ रही है। राधा कृष्ण की ऐसी ही एक लीला गोवर्धन पर्वत के पास चल रही थी।
श्रीराधा रानी भगवान श्रीकृष्ण और सखियों के साथ आंख मिचौली खेल रही थी। अचानक उनकी नज़र अपने पैरों पर गई और वह बेचैन हो उठीं। सखियों ने पूछा क्या हुआ तो राधा जी बोली मेरी बिछुआ गुम हो गई है।
राधा रानी सखियों के साथ बिछुआ ढूंढने लगी लेकिन बिछुआ कहीं मिला नहीं। तभी भगवान ने एक लीला दिखाई पास के एक कुण्ड में जाकर बहुत से बिछुआ लेकर आ गए।
श्री कृष्ण यह देखना चाहते थे कि राधारानी अपना बिछुआ पहचान पाती हैं या नहीं। कृष्ण ने कहा कि लो अपना बिछुआ पहचान लो। राधा कृष्ण की लीला समझ गईं और उन्होंने कहा कि तुम भी तो मेरा बिछुआ पहचानते हो तुम खुद ही मेरे पैरों में पहना दो।
राधा का इतना कहना था। श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर राधा के पैरों में बिछुआ पहनाने लगे। श्री कृष्ण जिस कुण्ड से बिछुआ लेकर आए थे वह बिलछु कुंड और बिछुआ कुंड के नाम से जाना जाने लगा।
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के दौरान मार्ग में आप इस कुंड के दर्शन कर सकते हैं। यहां बिलछु बिहारी जी का एक प्राचीन मंदिर भी है जो राधा कृष्ण की इस लीला की कथा कहते हैं।