2. भयदायक चलचित्र के निर्देशक, पटकथा लेखक और कलाकारों के संदर्भ में शोध: हमारे छायाचित्र हमारे स्पंदन अंकित करते हैं इसलिए उस चलचित्र में भूमिका करने से एक वर्ष पूर्व, वह करते समय, उसके प्रीमियर के समय और 1-2 वर्षों के उपरांत उन कलाकारों के ‘यूएएस’द्वारा परीक्षण कर निरीक्षण अंकित किए गए ।
समय निकलते निकलते निर्देशक के वलय अधिकाधिक नकारात्मक होते गए। उसके मुख्य कलाकार के वलय अधिक नकारात्मक थे। उस चलचित्र के कारण दो कलाकारों की बढ़ी हुई नकारात्मकता उसके उपरांत कभी नहीं सुधरी। पटकथा लेखक का नकारात्मक वलय सर्वाधिक था। चलचित्र से पूर्व उनका वलय 59 मीटर से प्रारंभ होकर चलचित्र के उपरांत प्रीमियर के 3 वर्षों के दूसरे भाग में (सीक्वल) 84 मीटर तक पहुंच गई थी। इनमें से किसी का भी वलय सकारात्मक नहीं था। ऐसे नकारात्मक व्यक्ति अपने प्रभाव से पटकथा लेखक, निर्देशक और कलाकारों को समाज में नकारात्मकता फैलाने वाले चलचित्र बनाने हेतु प्रेरित करते हैं।
हमारे शोध द्वारा हमने यही जाना है कि, ‘भयदायक चलचित्र’देखने से केवल भावनात्मक परिणाम नहीं होता, अपितु सूक्ष्म स्पंदनों के स्तर पर होने वाले भयंकर परिणामों का हमें भान भी नहीं होता। सूर्यास्त के उपरांत अनिष्ट शक्तियों का प्रभाव वातावरण पर अधिक होने के कारण उस समय ऐसे चलचित्र देखना अधिक संकटदायी होता है ।