एकादशी का व्रत हर महीने रखा जाता है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हिंदू सनातन धर्म में इस व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। इस व्रत को रखने से भगवान की विशेष कृपा मिलती है। शास्त्रों में एकादशी व्रत रखने के कुछ नियम और सावधानियां बरती जाती है। वरुथिनी एकादशी के मौके पर आइए जानते हैं एकादशी व्रत के नियम...
एकादशी तिथि पर क्या करें और क्या नहीं
- पुराणों में बताया गया है कि एकादशी तिथि पर पेड़-पौधों की टहनियां, फूल और पत्तियों को नहीं तोड़ना चाहिए। भगवान विष्णु को तुलसी का पत्ता बहुत ही प्रिय होता है। उनकी पूजा में इसका प्रयोग होता है, ऐसे में एक दिन पहले ही तुलसी के पत्तों को तोड़कर रख लेना चाहिए फिर एकादशी के दिन पूजा में इस्तेमाल करना चाहिए।
- एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटना चाहिए।
- एकादशी पर किसी से बहस और लड़ाई- झगड़ा नहीं करना चाहिए। इस दिन अपने से बड़े लोगों का भूलकर भी अपमान नहीं करना चाहिए।
- एकादशी पर व्रत करने के दौरान सात्विक विचार रखना चाहिए
- एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इसके अलावा एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन मांस, शराब, प्याज- लहसुन नहीं खाना चाहिए।
वरुथिनी एकादशी का महत्व
18 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वरुथिनी एकादशी का व्रत जो व्यक्ति विधि-विधान से पालन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में इस एकादशी को पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। वरूथिनी शब्द संस्कृत के वरुथिन से बना है, जिसका अर्थ होता है कवच, प्रतिरक्षक। शास्त्रों में कहा गया है कि इस एकादशी को व्रत करने भगवान विष्णु उन्हें हर तरह के संकट से उनकी रक्षा करते हैं। इस एकादशी के बारे में कहा गया है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने पर मिलता है, वह मात्र इस पावन वरुथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।