सीता नवमी का महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार इस पावन पर्व पर जो भी भगवान राम सहित मां जानकी का व्रत-पूजन करता है, उसे पृथ्वी दान का फल एवं समस्त तीर्थ भ्रमण का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है एवं समस्त प्रकार के दुखों, रोगों व संतापों से मुक्ति मिलती है। वैवाहिक जीवन को मधुर बनाने के लिए सीता नवमी के दिन विशेष रूप से श्रीराम संग माता सीता की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
सीता नवमी की पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। अब पूजा कक्ष में एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर राम परिवार का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। शुद्ध जल में गंगा जल मिलाकर भगवान श्री राम और सीता माता की मूर्तियों को स्नान कराएं। यदि तस्वीर की पूजा कर रहे हैं, तो गंगाजल के छींटे लगाकर स्वच्छ कपड़े से पौछ दें । अब विधि-विधान से भगवान राम और मां सीता की पूजा करें। मां सीता एवं रामजी को फल, फूल, धूप, दीप, सिंदूर,तिल, जौ, अक्षत आदि चीजें पूजा में अर्पित करें,प्रसाद लगाएं। पूजा के समय सीता चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती कर सुख, समृद्धि, धन एवं वंश में वृद्धि की कामना करें।
सीता नवमी पर करें ये उपाय
सीता नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में माता सीता को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और आपके सुहाग पर आ रहे सारे संकट का निवारण होता है। ये सुहाग की सामग्री सुहागिनों को दान करें। विवाह योग्य कन्याओं को मनपसंद जीवनसाथी की कामना के लिए इस दिन राम चरित्र मानस के इस मंत्र का जाप करें - जय जय गिरिवर राज किशोरी जय महेश मुख चंद चकोरी