सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। भगवान गणपति को शास्त्रों में प्रथम पूज्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करने से साधक को बुद्धि, विद्या और ज्ञान मिलता है। इनके स्मरण, ध्यान, जप आराधना से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और विघ्नों का नाश होता है। पौराणिक मत है कि इस दिन गणपति ने देवताओं का संकट दूर किया था इसलिए इस दिन को सकट चौथ कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के साथ सकट माता की भी पूजा की जाती है। सकट चौथ पर महिलाएं अपनी संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामनी करती हैं। धार्मिक मत है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेशजी की आराधना करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और घर में खुशियों का आगमन होता है।
व्रति महिलाओं को प्रात:काल स्नान करने के बाद पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा आसन पर बैठना चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प करके गणेश जी की पूजा-अर्चना शुरू करें। गणेश जी को जल, अक्षत, पुष्प, रोली, फल, मोदक, दुर्वा और पंचामृत अर्पित करें,भोग लगाएं । इसके उपरांत व्रती संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत की कथा सुनें और उसके उपरान्त गजानन की आरती करें।
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इन चीजों का लगाएं भोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार तिल चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश को तिल और गुड़ से बने तिलकुटा का भोग लगाने से गणेशजी प्रसन्न होते हैं। ऐसा करना संभव न हो तो थोड़े से तिल और गुड़ को मिलाकर भी भोग लगा सकते हैं इसके अलावा गजक,रेबड़ी आदि तिल से बनी चीजों का भोग लगाएं। इससे भी आपके जीवन में खुशहाली बनी रहेगी,गणेशजी का आशीर्वाद मिलेगा।
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इन मंत्रों करें जप
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मनोकामना पूर्ति के लिए गणेशजी के मंत्र करना बहुत लाभकारी माना जाता है।
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विघ्न-बाधाओं को दूर करने के लिए
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥
धन लाभ के लिए
ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
विधार्थी इस दिन 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप करके प्रखर बुद्धि और उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। 'ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात' का जप जीवन के सभी संकटों और कार्य बाधाओं को दूर करेगा।
इन वस्तुओं का करें दान
इस दिन तिल से बनी चीजों का दान विशेष रूप से करना चाहिए। गजक,रेवड़ी,तिल-गुड़,तिलकुटा आदि का दान शुभकारी होगा। इसके अलावा गर्म कपड़ों जैसे कंबल, रजाई, स्वेटर आदि का दान भी जरूरतमंदों को इस दिन करना चाहिए। व्रत करने वालों के लिए यदि संभव हो तो दस महादान जिनमें अन्नदान, नमक का दान, गुड का दान, स्वर्ण दान,तिल का दान, वस्त्र का दान, गौघृत का दान, रत्नों का दान, चांदी का दान और दसवां शक्कर का दान करें। ऐसा करके प्राणी दुःख-दरिद्र,कर्ज, रोग और अपमान के विष से मुक्ति पा सकता है। इस दिन गाय और हाथी को गुड खिलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।