एकादशी के महत्व को बताते हुए शास्त्र कहते हैं कि —
"नास्ति गंगासमं तीर्थं नास्ति मातृसमो गुरु:। नास्ति विष्णुसमं देवं तपो नानशनात्परम।। नास्ति क्षमासमा माता नास्ति कीर्तिसमं धनं। नास्ति ज्ञानसमो लाभो न च धर्मसमः पिता।। न विवेकसमो बन्धुर्नैकादश्याः परं व्रतं"।।
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान नारायण कि मूर्ति, जिसमे चारों भुजाएं, जिसमे शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित हो, उसे पीले वस्त्र धारण कराकर, मूर्ति के आकार वाले सुंदर पलंग पर लिटाकर पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद षोडशोपचार विधि से पूजन करें।
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'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।'