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Karwa Chauth 2021: सुहागिनों का मुख्य पर्व करवा चौथ व्रत, जानिए इसकी कथा

Thu, 21 Oct 2021 04:18 PM IST
विनोद शुक्ला शालिनी वर्मा
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karwa chauth 2021: सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला यह व्रत करवा चौथ इस बार 24 अक्टूबर को रोहिणी नक्षत्र में है। - फोटो : अमर उजाला
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भारतवर्ष में करवा चौथ एक ऐसा त्योहार है जिसे हर विवाहित महिला पूरी आस्था और विश्वास के साथ रखती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन इस निर्जला व्रत को महिलाएं अपने पति के स्वास्थ्य और उनकी दीर्घायु की मंगलकामना के लिए करती हैं। इस व्रत को अखंड सौभाग्य और शुभ संतान देने वाला माना गया है। करवाचौथ को उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विवाहित स्त्रियों के द्वारा मनाया जाता है।

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महिलाएं करवा चौथ के दिन कठिन उपवास रखती है और चांद के निकलने तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं। इस व्रत में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा का पूजन किया जाता है। स्त्रियां करवे में जल भरकर करवा चौथ व्रत की कथा सुनती हैं और पार्वतीजी की पूजा करके श्रृंगार का सामान चढ़ाती हैं। चंद्रोदय के बाद सुहागिन स्त्रियां उसकी पूजा कर अर्घ्य देती हैं और सुहाग की समस्त सामग्री अपनी सास को देती हैं। व्रत को खोलने से पहले इस दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला यह व्रत करवा चौथ इस बार 24 अक्टूबर को रोहिणी नक्षत्र में है। करवा चौथ की तीन-चार कहानियां प्रचलित हैं तो आइए जानते हैं करवा चौथ की कथा जो अधिकांश स्त्रियों द्वारा पढ़ी जाती है।

करवा चौथ की कथा
प्राचीन काल में एक धर्मपरायण ब्राह्मण था। उसके सात पुत्र थे और एक पुत्री थी। उसकी पुत्री सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण अपने भाइयों की बड़ी लाडली बहन थी। बड़ी होने पर उसका विवाह एक ब्राह्मण युवक से किया गया। विवाह के बाद वह अपने मायके आई। जब करवा चौथ आया तो उसने अपनी भाभियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखा परंतु शाम होते-होते वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी। शाम को जब उसके सभी भाई खाना खाने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी साथ में खाने का आग्रह किया। बहन का मुख एकदम से कुम्हलाया हुआ था, बहन ने भाइयों से कहा कि मेरा आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और चंद्रमा के निकलने पर उसे देखकर अर्घ्य देगी और तभी खाना खा सकती है। लेकिन चंद्रमा नहीं निकला है और वह उसकी ही प्रतीक्षा कर रही है।

भूख-प्यास से व्याकुल बहन की ये हालत उसके भाइयों से देखी नहीं गई। उसके एक भाई ने बहन की ऐसी हालत देख पीपल के पेड़ पर चढ़कर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख दिया। दीपक की रोशनी दूर से देखने पर ऐसा लगने लगा कि चांद ही निकल आया है। इसके बाद एक भाई ने आकर बहन को कहा कि चलो बहन चांद निकल आया है, तुम अर्घ्य दे दो और भोजन कर लो। बहन ने सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद के दर्शन किए और उसे अर्घ्य देकर खाना खाने बैठ गई।
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पर जैसे ही उसने पहला कौर मुँह में डाला तो उसे छींक आ गई। दूसरा टुकड़ा खाते ही उसमें बाल निकल आया और जैसे ही उसने तीसरा कौर खाने की कोशिश की तो उसके पति की मृत्यु का समाचार आ गया। अब तो उसने विलाप करना शुरू कर दिया तब उसकी भाभी ने पूरी सच्चाई से अवगत कराया कि उसके साथ आखिर ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ के व्रत को गलत तरीके से तोड़ने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं। उसने अपनी भाभी से पूछा कि अब उसे क्या करना चाहिए ? भाभी ने ननद को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करवाचौथ का व्रत करने के लिए कहा। उसने अपने पति का दाह संस्कार नहीं करने दिया और पूरी श्रद्धा से करवाचौथ का व्रत रखा। उसकी श्रद्धा और भक्ति देख कर भगवान प्रसन्न हो गए और उन्होंने उसे सदा सुहागन का आशीर्वाद देते हुए उसके पति को जीवित कर दिया। तभी से सुहागिन महिलाओं का करवाचौथ व्रत पर अटूट विश्वास होने लगा और यह व्रत पूरी आस्था के साथ हर घर में मनाया जाता। तो हम तो यही प्रार्थना करते हैं कि जिस प्रकार सात भाइयों की बहन को सदा सुहागन का वरदान मिला, वैसा ही सभी सुहागिन स्त्रियों को मिले।
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