हरतालिका तीज व्रत नियम
- वैसे तो हरतालिका तीज व्रत रखने के नियम विवाहित और अविवाहित कन्याओं के लिए समान हैं, लेकिन इनका सही ढंग से पालन करने के लिए इन नियमों को जानना जरूरी है।
- अविवाहित कन्याओं को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ व्रत करने का संकल्प लेकर अपना व्रत शुरू करना चाहिए। संकल्प ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धरण करके लें।
- हरतालिका तीज एक निर्जला व्रत है, जिसका अर्थ है कि व्रत करने वाला दिन के दौरान भोजन या पानी का सेवन नहीं करता है। व्रत को उन्हीं नियमों के अनुसार करने का प्रयास करें। लेकिन कुंवारी कन्याएं इस व्रत को फलाहार के साथ भी कर सकती हैं।
- अविवाहित कन्याओं को पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए। एक साफ चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां या चित्र रखें और फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करें। इस व्रत की प्रथम पूजा सायं काल में की जाती है।
- हरतालिका तीज व्रत के उत्सव के दौरान, अविवाहित लड़कियों को पारंपरिक परिधान धारण करने चाहिए और विवाहित महिलाओं को पारंपरिक वस्त्रों के साथ सोलह श्रृंगार करना चाहिए।
- व्रत रखने वाली अविवाहित कन्याओं को अच्छे जीवनसाथी के लिए मां गौरी की प्रार्थना करनी चाहिए।
- अगले दिन भोर में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके व्रत खोलना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।