हरियाली तीज व्रत कथा
हिंदू धर्म में हरियाली तीज के व्रत को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में खुशियां बनी रहती है। इस उपवास की पूजा में हमेशा व्रत कथा सुननी चाहिए। हरियाली तीज व्रत की कथा को लेकर ऐसा कहा जाता है कि एक बार महादेव देवी पार्वती को अपने पूर्व जन्म की याद दिलाते हुए उन्हें कहते हैं कि हे पार्वती ! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया। साथ ही तुमने अन्न और जल का भी त्याग करा।
चाहे तपती गर्मी हो या भारी सर्दी, या फिर हो बरसात, इन सभी मौसम का सामना करते हुए भी तुमने कठोर तप किया। उसके बाद मैं तुम्हें वर के रूप में प्राप्त हुआ। इस कथा को सुनाते हुए भगवान शिव आगे कहते हैं कि पार्वती ! एक बार नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे थे। तुम्हारे घर जाने के बाद उन्होंने आपके पिता जी से कहा कि मैं विष्णु जी के भेजने पर यहां आया हूं। भगवान विष्णु स्वयं आपकी तेजस्वी कन्या पार्वती से विवाह करना चाहते हैं। ये बात सुनकर पर्वतराज खुश हो गए और उन्होंने शादी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। फिर ये खबर जब आपके पिता जी ने तुम्हें बताई तो तुम दुखी हुई।
फिर तुमने ये बात अपनी सखी को बताई। तुम्हारी ये गाथा सुनकर उसने तुम्हें घनघोर जंगल में तुम्हें तप करने की सलाह दी। फिर अपनी सखी की बात मानकर तुम मुझे पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में एक गुफा के अंदर रेत की शिवलिंग बनाकर तप करने लगीं। इस दौरान तुम्हारे पिता पर्वतराज ने पूरी धरती और पाताल पर तुम्हारी खोज की, लेकिन तुम उन्हें नहीं मिली।
दूसरी ओर तुम गुफा में सच्चे मन से तप करने में लगी रहीं। फिर सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें दर्शन दिए। तुम्हें दर्शन देने के बाद तुम्हारी मनोकामना को पूरा करने का वचन देते हुए तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इसके बाद तुम्हारे पिता भी ढूंढते हुए गुफा तक पहुंच गए। आपने अपने पिता जी से कहा कि, मैं आपके साथ तभी चलूंगी, जब आप मेरा विवाह शिव के साथ करवाएंगे।
तुम्हारी कठोर तपस्या और हठ के आगे पिता जी की एक न चली। उन्होंने ये विवाह करवाने के लिए हामी भर दी। कथा को सुनाते हुए भोलेनाथ ने कहा कि श्रावण तीज के दिन तुम्हारी इच्छा पूरी हुई और तुम्हारे कठोर तप की वजह से ही हमारा विवाह संभव हो सका। तभी से ऐसी मान्यता है कि जो भी महिला श्रावणी तीज पर व्रत रखती है, उसके वैवाहिक जीवन के सारे संकट दूर हो जाते है। साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।