शिवलिंग की पूजा का महत्व
शिवलिंग की पूजा करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री
पूजा में आप पूजा के बर्तन, पंच मिष्ठान्न, बेलपत्र, धतूरा, भांग, बेर, गुलाल और सफेद चंदन को जरूर रखें। इसके अलावा पंच फल, दक्षिणा, गन्ने का रस, गंगाजल, जल, दूध दही, कपूर, धूप, दीप, रूई, शहद, घी, नैवेद्य और रूद्राक्ष की माला सामग्री को भी रखें।
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शिवलिंग की पूजा विधि
आचमन: सबसे पहले आचमन करें। आचमन करते हुए, 'ॐ केशवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ हृषीकेशाय नम:. इन मंत्र का उच्चारण करते हुए अंगूठे से मुख पोछ लें और ॐ गोविंदाय नमः मंत्र बोलकर हाथ धो लें। शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। शिवलिंग पर बेलपत्र और फूल चढ़ाएं, संभव हो तो धतूर का फूल भी चढ़ाएं। नैवेद्य का शिवलिंग को भोग लगाएं। पंचाक्षर मंत्र 'नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें। आप 21 बार भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद शिवजी की आरती करें।
शिवलिंग की पूजा के नियम
शिवलिंग को हमेशा साफ-सुथरा रखें। शिवलिंग को कभी भी पैरों से स्पर्श न करें। शिवलिंग को तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाएं। शिवलिंग को कभी भी अकेला न छोड़ें। शिवलिंग की पूजा करते समय मन को एकाग्र रखें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।