बागवानी बहुल हिमाचल के बागवान साल भर तक विदेशी सेब पौधों का इंतजार करते रहे। कांग्रेस शासनकाल में विश्व बैंक की 1134 करोड़ की वित्तीय मदद से प्रदेश के सेब क्षेत्रों में चलाया जा रहा बागवानी विकास प्रोजेक्ट साल भर चर्चा में रहा। विश्व बैंक ने सरकार को यहां तक कहा था कि प्रोजेक्ट का काम धीमी रफ्तार से चलता रहा तो बागवानी विकास प्रोजेक्ट को वित्तीय मदद देने में हाथ पीछे खींच लिए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक को जब भरोसा दिलाया कि इस प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाई जाएगी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार काम किया जाएगा। साल भर तक प्रोजेक्ट से सबसे जुड़े रहे दोषी अफसरों को सरकार कोसती रही और कार्रवाई करने की बात भी कही जाती रही। प्रोजेक्ट के तहत सेब के पौधे खरीदने में कोताही करने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। इटली के सेब के बाद बागवान अमेरिका के सेब पौधों की बाट जोहते रहे और अब सरकार प्रदेश के बागवानों को अमेरिका से सेब की अच्छी किस्मों के पौधे दिलाने के लिए जतन कर रही है।
साल के अंत में सरकार ने अमेरिका से सेब के पौधे आयात करने को बागवानी विभाग के अधिकारियों का दल अमेरिका भेजा। यह दल अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर लौट आया है। अमेरिका से सेब पौधे आयात होने का मामला नए साल में जा रहा है। प्रोजेक्ट में इटली से आयात किए सेब पौधे बागवानों तक नहीं पहुंचे, न ही इन्हें सरकारी नर्सरियों में ज्यादा सफ लता मिली। सरकार ने इतना जरूर किया है कि प्रोजेक्ट के तहत काम करने के लिए करीब सौ लोगों की फील्ड और तकनीकी स्टाफ के रूप में तैनाती की है।