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अनंत मूर्ति के देहांत पर जश्न का विरोध

Mon, 25 Aug 2014 02:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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देश के मशहूर लेखक यूआर अनंत मूर्ति के देहांत पर कर्नाटक में मनाए गए जश्न का हिमाचल प्रदेश के साहित्यकारों ने कड़ा विरोध किया है। सूबे के लेखकों का कहना है कि यह अभिव्यक्ति के अधिकार पर कुठाराघात है। साहित्यकार राजेंद्र राजन ने कहा कि लेखक के विचारों से किसी का भी मतभेद हो सकता है।
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मगर इतने बड़े लेखक कि मृत्यु के बाद पटाखे फोड़ना और जश्न मनाना निंदनीय है। ठीक है कि अनंत मूर्ति नरेंद्र मोदी के विरोध में थे, लेकिन जो कुछ कर्नाटक में हुआ वह घृणित कार्य है। भाजपा की विचारधारा से कोई भी बड़ा लेखक तैयार नहीं हुआ। भाजपा के नेताओं में लेखकों के प्रति सम्मान भाव नहीं है।

जश्न मनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कथाकार एसआर हरनोट ने कहा कि यह अत्यंत निंदनीय है। बोलने और लिखने की आजादी पर प्रहार है। इससे लगता है कि साहित्य के बुरे दिन आने वाले है। इतने बड़े लेखक के मौत पर जश्न मनाना ठीक नहीं है।
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साहित्यकार मधुकर भारती ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर इसी तरह से हमले होते रहे तो एक दिन देश में एकता का फाइवर टूट जाएगा। मोदी के खिलाफ अनंत मूर्ति के निजी विचारों का समर्थन किसी ने नहीं किया। लेकिन उनकी मौत के बाद जो हुआ, उसे किसी भी तरह न्याय संगत नहीं ठहराया जा सकता है।

कवि आत्मा रंजन ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है। यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का अपमान है। इसे अतिवादी और घिनौना कृत्य कहा जा सकता है। अनंत मूर्ति कन्नड़ के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के बड़े लेखक थे।

उन्होंने सवाल किया कि यह कैसे भारतीय मूल्य हैं। साहित्यकार राज कुमार राकेश ने कहा कि यह फासिस्ट पूर्वाग्रह है। एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति के लेखक के देहांत पर जश्न मनाना शर्मनाक है।
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