कालका से तेजी से काम शुरू हुआ। इसमें कहीं पुल तो कहीं छोटी सुरंगे बनाकर अंग्रेज इंजीनियर और कामगार आगे बढ़ रहे थे। तभी बड़ोग के पास ऐसा पहाड़ सामने आया कि बिना टनल बनाए यहां आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसीलिए पहाड़ को काटते हुए लंबी टनल बनाने का फैसला लिया गया। कर्नल बड़ोग इस टीम की अगुवाई कर रहे थे। दोनों ओर से पहाड़ को काटना शुरू किया गया। टनल के दोनों सिरे आपस में मिल नहीं पा रहे थे। कई बार खुदाई की गई। इस पर खर्चा करीब 10 गुणा तक बढ़ गया। आखिरकार अंग्रेजी सरकार ने कर्नल बड़ोग को काम से रोक दिया। बताया जाता है कि ब्रिटिश सरकार ने अंग्रेज इंजीनियर कर्नल बड़ोग पर एक रुपये का जुर्माना लगा दिया था। ये जुर्माना देना मुश्किल नहीं था लेकिन बात सम्मान की थी। ऐसे में कर्नल बड़ोग ने इसी टनल के अंदर जाकर आत्महत्या कर दी थी। उसके बाद हिमाचल निवासी बाबा भलकू ने इसका काम पूरा करवाया। लेकिन इस टनल के एक सिरे को अब बंद कर दिया गया है।
लोग डरते हैं टनल के पास जाने से
दावा किया जाता है कि इंजीनियर कर्नल बड़ोग की मौत के बाद यहां अप्रिय घटनाएं होने लगी थीं। कई लोगों को इंजीनियर की आत्मा दिखाई देने लगी। रात को कुछ लोग जब यहां से गुजरते तो उन्हें इंजीनियर के चिल्लाने तक की आवाज सुनाई देने लगी थी। स्थानीय लोगों ने रात के समय यहां से गुजरना तक बंद कर दिया। दावा है कि लोगों ने बाद में यहां पर पूजा-पाठ भी करवाया। जिसके बाद यहां पर अब कुछ हद तक आवाजें बंद हुईं। हालांकि स्थानीय लोग आज भी इस टनल के आसपास जाने से डरते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का दावा यह भी है कि यह आवाजें टनल के अंदर पानी की है। बड़ोग टनल इस ट्रैक पर सबसे लंबी सुरंग है। इस हैरिटेज ट्रैक से ही लाखों पर्यटक शिमला पहुंचते हैं। बड़ोग स्टेशन के पास इस घटना से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।