नशा तस्करों को पकड़ने में शिमला पुलिस आगे, जांच और सबूतों की कमी से छूट रहे ज्यादातर आरोपी
एनडीपीएस, पॉक्सो से जुड़े मामले पर आयोजित कार्यशाला में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टा तस्करों के कई बड़े गिरोह पकड़ने वाली शिमला पुलिस नशे के खिलाफ चले अभियान में तो आगे है लेकिन इन मामलों में पकड़े जा रहे आरोपियों को सजा नहीं दिला पा रही है। कमजोर जांच, गवाह मुकरने और सबूतों की कमी के चलते ज्यादातर आरोपी चंद दिनों में ही पुलिस की गिरफ्त से छूट रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शिमला पुलिस ने एनडीपीएस के मामलों में कुल 391 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामलों की जांच पूरी होने के बाद जब ये मामले सुनवाई के लिए अदालत में पहुंचे तो ज्यादातर में आरोपी बरी हो गए। 391 आरोपियों में से सिर्फ 98 को ही पुलिस सजा दिला पाई। बाकी 293 आरोपी रिहा हो गए। एनडीपीएस, एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के मामलों में पुलिस जांच को और मजबूत करने के लिए रविवार को राजधानी में हुई कार्यशाला में यह चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की गई।
जिला प्रशासन की ओर से होटल होलीडे होम में करवाई गई इस कार्यशाला के दौरान जिला भर के पुलिस अधिकारियों से जांच में आ रही दिक्कतों के बारे में पूछा गया। इस दौरान प्रशासनिक, न्यायिक और स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि किन कारणों से एनडीपीएस और पॉक्सो के मामलों की जांच में कमी आ रही है।
पॉक्सो मामलों में 49 को सजा, 89 दोषमुक्त
कार्यशाला में जिला न्यायवादी सुधीर शर्मा ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत 2021 से 2025 तक कुल 138 मामले कोर्ट पहुंचे हैं। इनमें 49 मामलों में ही दोष सिद्धि हुई जबकि 89 मामलों में आरोपी दोषमुक्त हो गए। पांच वर्षों की दोष सिद्धि दर 35 फीसदी पाई गई है।
नशे की आड़ में लड़कियों का शोषण
आईजीएमसी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण एस भाटिया ने कहा कि चिट्टे की चपेट में लड़कों के साथ लड़कियां की संख्या भी बढ़ रही है। सिरिंज के इस्तेमाल और नशे की डोज की आड़ में लड़कियों का शारीरिक शोषण हो रहा है। कई लड़के सेनेटरी पैड को उबालकर उसका पानी नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह चिंताजनक है। कार्यशाला में एएसपी मेहर पंवार ने पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रावधानों को लेकर जानकारी दी। फॉरेंसिक सर्विस निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. विवेक सहजपाल ने डीएनए प्रोफाइलिंग को लेकर जानकारी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशवंत रांटा ने एमएलसी और पोस्टमार्टम के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी।