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शिमला: आंगनबाड़ी और मिड-डे मील नीतियों के खिलाफ गरजे वर्कर

Fri, 24 Sep 2021 07:41 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

 मिड डे मील वर्कर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कांता महंतने  कहा कि केंद्र सरकार मिड डे मील योजना के निजीकरण की साजिश रच रही है। साल दर साल इस योजना के बजट में कटौती की जा रही है। इस वर्ष भी मध्याह्न भोजन योजना के बजट में चौदह सौ करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई है। 
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आंगनबाड़ी और मिड-डे मील नीतियों के खिलाफ गरजे वर्कर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आंगनबाड़ी और मिड-डे मील विरोधी नीतियों के खिलाफ शुक्रवार को प्रदेश भर में सीटू के बैनर तले वर्करों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान जिला उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे। वर्कर यूनियनों ने निजीकरण का विरोध किया। मिड डे मील वर्कर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कांता महंत व महासचिव हिमी देवी ने केंद्र सरकार की मिड डे मील विरोधी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मिड डे मील योजना के निजीकरण की साजिश रच रही है। साल दर साल इस योजना के बजट में कटौती की जा रही है। इस वर्ष भी मध्याह्न भोजन योजना के बजट में चौदह सौ करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 के बाद मिड डे मील कर्मियों के वेतन में एक भी रुपये की बढ़ोतरी नहीं की है। उन्हें वर्तमान में केवल 2600 रुपये वेतन मिल रहा है जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी मात्र एक हजार रुपये है।

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उन्होंने सरकार से मांग की है कि मिड डे मील कर्मियों को न्यूनतम वेतन नौ हजार रुपये दिया जाए। महिला कर्मियों के लिए वेतन सहित छह महीने का प्रसूति अवकाश देने की मांग भी की। 45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार कर्मियों को नियमित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर स्कूल में सभी तरह का कार्य करते है। उन्हें ही मल्टी टास्क वर्कर के रूप में नियुक्त किया जाए। उन्होंने डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर योजना पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कर्मियों को साल में दो ड्रेस, बीमा योजना लागू करने, रिटायरमेंट पर चार लाख रुपये ग्रेच्युटी देने, दुर्घटना में पचास हजार रुपये, मेडिकल सुविधा लागू करने व सभी प्रकार की छुट्टियां देने की मांग की। उधर, आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन भी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी।

यूनियन अध्यक्षा नीलम जसवाल व महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मी प्री प्राइमरी में सौ प्रतिशत नियुक्ति किए जाएं। हरियाणा की तर्ज पर वेतन दिया जाए। रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष की जाए। उन्होंने कहा कि नंद घर बनाने की आड़ में आईसीडीएस को एक कंपनी के हवाले करके निजीकरण की साजिश रची जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से वर्ष 2013 में हुए 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित करने की मांग भी की। आंगनबाड़ी कर्मियों को हरियाणा की तर्ज पर वेतन और अन्य सुविधाएं देने की अपील भी की। 

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