हिमाचल में जंगली-जानवरों और लावारिस पशुओं ने खेती को चौपट कर दिया है। प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों ने भी चुनाव में ये मुद्दा उठाया है। यहां हिमाचल को इससे 500 करोड़ रुपये तक का सालाना नुकसान हो रहा है। हिमाचल के कई क्षेत्रों के ग्रामीण तो इसके कारण खेती छोड़ने तक मजबूर हो गए हैं। हिमाचल में कुल जोतें 9 लाख 62 हजार हैं।
यानी इतने ही परिवार खेतीबाड़ी कर रहे हैं। प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 11.74 प्रतिशत क्षेत्र ही कृषि योग्य है। यानी लगभग छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है। यहां 78 हजार 791 हेक्टेयर भूमि बंजर है। एक आकलन के मुताबिक हिमाचल में 3243 ग्राम पंचायतों में से 2301 जंगली-जानवरों की समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित रही हैं।
प्रदेश में जंगली-जानवरों में बंदर, जंगली सुअर, नीलगाय, खरगोश, शाही और अन्य पशु खेती के दुश्मन हो गए हैं। यहां जंगली-जानवरों की भी एक दर्जन से अधिक प्रजातियां हैं। इनमें लोगों की ओर से खुले में छोड़े गए लावारिस पशु भी शामिल हैं।