भारतीय सेना की सैंकड़ों एकड़ जमीन पर कुछ दबंग लोगों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। अकेले हिमाचल में ही सेना की 143 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है।
सेना और रक्षा मंत्रालय लगातार इस अतिक्रमण को छुड़ाने के लिए प्रयासरत हैं। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने हिमाचल सरकार से अवैध कब्जों से भूमि को मुक्त करवाने का आग्रह किया है।
राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से सूचना मिली है कि हिमाचल में सेना की 143.4574 एकड़ (715 बीघा) जमीन पर अतिक्रमण है। यह अतिक्रमण सैन्य क्षेत्र के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने किया है और कुछ क्षेत्र सरकारी नियंत्रण में भी हैं।
हिमाचल में सेना की जमीन पर यह अतिक्रमण शिमला, कांगड़ा, सोलन आदि जिलों के कई छावनी और अन्य सैन्य क्षेत्रों में हुआ है। भारत के तमाम राज्यों में यह कब्जा 11,455 एकड़ जमीन पर बताया जा रहा है।
देश भर में सेना की छावनियों के बाहर की डिफेंस लैंड का सर्वेक्षण इलेक्ट्रोनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) के माध्यम से किया गया। छावनियों के भीतर सेना की भूमि का सर्वेक्षण वैक्पोज, आईआईटी रुड़की, दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय, एनआईटी इलाहबाद आदि ने किया है।
इसके लिए रिकार्ड जनरल लैंड रजिस्टर (जीएलआर) और रक्षा संपदा अधिकारियों के पास संरक्षित मिलिटरी लैंड रजिस्टर और छावनी बोर्ड से लिया गया है। इसी सर्वेक्षण से प्रदेश में अतिक्रमण के मामले अधिक स्पष्ट हुए हैं।
रक्षा मंत्रालय हिमाचल के पड़ोसी राज्यों से भी सेना की भूमि पर अतिक्रमण छुड़ाने के प्रयास में है। सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड में 35.33 एकड़, पंजाब में 485.77, जम्मू-कश्मीर में 730, हरियाणा में 1002.46, यूपी में 3142.42 और दिल्ली में 113.59 एकड़ सेना की भूमि पर अतिक्रमण है।