पेयजल संकट के बीच राजधानी शिमला में बीमारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। शहर में बोझा ढोने वाले कुली इन दिनों नालों का दूषित पानी लाकर बाजारों में बेच रहे हैं। 20 लीटर पानी की गैलन 50 रुपये में बेची जा रही है।
शहर के होटलों और ढाबों में नालों के दूषित पानी का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर के अधिकतर प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी पीने योग्य नहीं है।
नगर निगम ने बाकायदा इन जल स्रोतों के पानी की जांच कर सैंपल फेल होने के बाद बावड़ियों पर पानी का पीने के लिए इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए हैं।
बावजूद इसके शांकली, रुल्दूभट्टा, खलीनी, विकासनगर और आईजीएमसी नाले से पानी भर कर शहर के बाजारों में बेचा जा रहा है। जल संकट के बीच शहर में जल जनित रोग फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
पिछले कई महीनों से घरों में इमरजेंसी के लिए स्टोर रखे गए पानी का लोग प्रयोग कर रहे हैं। बासी पानी के इस्तेमाल के कारण बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।