हिमाचल प्रदेश की राजधानी सहित तीस शहरों में घोर जल संकट को कांग्रेस ने पेयजल आपातकाल बताया है। प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि यह आज तक का सबसे बड़ा पेयजल संकट है। पीने के पानी की इतनी कमी राजधानी और प्रदेश के बड़े शहरों में कभी नहीं हुई। भीषण गर्मी में सरकार के साथ आईपीएच विभाग का पूरा प्रशासनिक ढांचा धराशायी हो गया है।
सुक्खू ने कहा कि शिमला शहर में पेयजल संकट ने पर्यटकों के सामने हिमाचल की नाक कटवाकर रख दी है। पानी के नाम पर पर्यटकों को लूटा जा रहा है। इससे देश में राज्य की फजीहत हो रही है। चूंकि, इन दिनों शिमला में पर्यटन अपने चरम पर है। कहा कि सरकार इतने दिन से चले आ रहे जल संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना पाई।
कहा कि हैरानी की बात तो यह है कि शिमला में समानांतर सरकार चल रही है। जयराम सरकार, नगर निगम और आईपीएच विभाग का आपस में कोई तालमेल नहीं है। निगम के समानांतर सरकार चलाने से ही शहर में घोर जल संकट खड़ा हुआ है। निगम मेयर और अधिकारियों ने जमीनी स्थिति से भी सरकार को अवगत नहीं कराया।
इससे यह संकट बढ़ता जा रहा है। सुक्खू ने कहा कि प्रतीत होता है कि आईपीएच विभाग ने गर्मियों के लिए कोई तैयारी ही नहीं की थी। अगर विभाग अलर्ट होता तो प्रदेश में पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि नहीं मचती। उन्होंने जयराम सरकार को सलाह दी है कि हनीमून पीरियड से बाहर निकलकर जनता की समस्याएं सुलझाएं। बड़ी संख्या में टैंकर लगाकर लोगों को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करें। पर्यटकों से पानी के नाम पर हो रही लूट भी रोकी जाए।