नगर निगम ने भरी बरसात में शहर में पानी की राशनिंग शुरू करने का फरमान जारी कर दिया है। पिछले चार दिनों से आधे शहर को पानी नहीं मिला और अब शहर के लोगों को एक दिन छोड़ कर पानी दिया जाएगा। हैरत इस बात की है कि सालों से चली आ रही शिमला शहर की पेयजल समस्या को कोई भी सरकार दूर नहीं कर सकी।
हर साल नई योजना का प्रस्ताव लाकर जनता को सपने दिखाए जाते हैं लेकिन इन योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा जाता। वहीं आईपीएच महकमे का दावा है कि वह शहर की जरूरत के मुताबिक पूरा पानी दे रहा है। ऐसे में नगर निगम की पानी की वितरण प्रणाली भी कठघरे में है। साथ ही यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि एमसी को राशनिंग शुरू करने की जरूरत किसकी नालायकी की वजह से पड़ी।
पानी को तरसे लोग
आईपीएच और नगर निगम की पानी के लिए मच रही सियासत में आम आदमी पिस कर रह गया है। दोनों सरकारी अमले पानी देने का दावा कर रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत की तस्वीर भयावह है। पानी की एक बाल्टी तो दूर लोग एक बोतल भरने के लिए भी तरस चुके हैं। सबसे ज्यादा मुश्किलें बुजुर्गों को पेश आ रही हैं।
बुधवार को अमर उजाला की टीम न्यू शिमला पहुंची। यहां लोग पांच दिनों से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। न्यू शिमला जोन के कंगना धार के लोगों से बात करने पर नगर निगम और आईपीएच के दावे की पोल सामने आ गई। कंगनाधार की उमा सिंह ने कहा कि मेरे घर में चार दिन से पानी नहीं आया है। मुझे पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है बुढ़ापे में पैदल चलने में असमर्थ हूं।
लेकिन पानी के बिना रहना मुश्किल है इसलिए मजबूरन एक-एक बोतल पानी की भरकर एक किलोमीटर दूर बावड़ी से लाती हूं। कंगनाधार की ही पुष्पा रघुवंशी ने कहा कि उनके घर में भी चार दिन से पानी नहीं आया है। बारिश आने पर मकान के छत से पानी की इकट्ठा कर रहे हैं। न्यू शिमला की महिला सुरेंद्रा ने बात करने पर बताया चार दिन से पानी नहीं आ रहा है।
इस बार तो नगर निगम ने हद ही कर दी है अगर पानी के बिल का हम टाइम से भुगतान ना करें तो विभाग एक्सट्रा चार्ज लगाता है और जब पानी न दें तो दस तरह के बहाने लगाता है। न्यू शिमला जोन के कुछ लोग बावड़ी से भी पानी ढो रहे हैं। बावड़ी के साथ मंदिर के पुजारी घनश्याम ने कहा कि चार-पांच दिन से यहां सैकड़ों की संख्या में लोग पानी के लिए आ रहे हैं।
बेटा भला हो सरकार का, नहीं रेंगती जूं
हाथ में खाली बोतल लिए वह पानी की तलाश में घर से बाहर निकलते हैं और बावड़ी से पीने के लिए एक बोतल ही ला पाते हैं। पूछने पर एक बुजुर्ग ने कहा बेटे इतनी दूर से बाल्टी भर कर नहीं ला सकती। बस बोतल से पीने के पानी का गुजारा हो गया है। गुस्से के बजाय बस इतना कहती है भला हो सरकार का। यहां कौन हैं सुनने वाला, शिकायत करें भी तो किसके कान पर कौन सी जूं रेंगने वाली है। नगर निगम के सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक ने कहा कि शहर में अब पानी की राशनिंग शुरू कर दी है। अब ऐसी दिक्कतें नहीं आएंगी।