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हिमाचल: मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर से श्री केदारनाथ धाम के किए वर्चुअल दर्शन, सुना पीएम का संबोधन

Fri, 05 Nov 2021 12:48 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

 प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम के लिए बाबा भूतनाथ मंदिर में पूरी व्यवस्था की गई थी। 
मंडी के अधिष्ठाता बाबा भूतनाथ का इतिहास करीब पांच सौ साल पुराना है। वर्ष 1527 में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। मंडी भगवान भोले शंकर की कर्मभूमि के रूप में भी विख्यात है।
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बाबा भूतनाथ मंदिर से श्री केदारनाथ धाम के किए वर्चुअल दर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोवर्धन पूजा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में करीब 400 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान  हिमाचल प्रदेश के मंडी के प्रसिद्ध मंदिर बाबा भूतनाथ समेत ज्वालाजी शक्तिपीठ से केदारनाथ धाम से लाइव दर्शन किए। इसके अलावा चौरासी मंदिर परिसर भरमौर से भी लोगों ने केदारनाथ में प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुना। मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर, सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल, नगर निगम की महापौर दिपाली जस्वाल, उप महापौर वीरेंद्र भट्ट सहित अन्य पार्षद, मिल्कफेड के अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा, जिला परिषद अध्यक्ष पाल वर्मा, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता अजय राणा, उपायुक्त अरिंदम चौधरी, एसडीएम रितिका जिंदल, ज़िला भाजपा अध्यक्ष रणवीर सिंह और दलीप सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष कपूर, सहित अन्य लोग मौजूद हैं।

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इस मौके बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती महाराज, भुंतर के श्री राधा कृष्ण मंदिर के महंत रामशरण दास महाराज व उनके शिष्य हरिमोहन दास, असम गुवाहाटी से बाबा श्रवण दास महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम के लिए बाबा भूतनाथ मंदिर में पूरी व्यवस्था की गई थी। मंडी के अधिष्ठाता बाबा भूतनाथ का इतिहास करीब पांच सौ साल पुराना है। वर्ष 1527 में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। मंडी भगवान भोले शंकर की कर्मभूमि के रूप में भी विख्यात है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार पर्वतराज की पुत्री पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बरातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के वापस न आने पर पार्वती रोने लगीं, उसके विलाप को सुनकर पुरोहित आगे आया। उसने शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना की गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने कहा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है। इस पर पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। यहां भोलेनाथ स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए हैं।

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