हिमाचल में दो हजार पशु फार्मासिस्ट न्याय के लिए प्रदेश सरकार से टकटकी लगाए हैं। पंजाब की तर्ज पर पशु निरीक्षक तक नहीं बनाए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी पंचायतों में लगाए गए पशु चिकित्सा सहायकों को रेगुलर करने को नीति भी सरकार नहीं बना पाई है। पिछले सात साल से लगे पशु चिकित्सा सहायकों को पूरा वेतन तक नहीं दिया जा रहा, जबकि इनकी तैनाती वर्ष 2010 में की गई थी। इनको वेतन भी मस्टररोल से दिया जा रहा है।
प्रदेश में पिछले कई साल से पशु फार्मासिस्टों की मांगों पर प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई सुनवाई नहीं की है। प्रदेश में करीब दो हजार पशु फार्मासिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा 1272 पशु चिकित्सा सहायकों की तैनाती पंचायतों में की गई है। इन्हें सरकार पिछले करीब आठ साल से सात हजार प्रति माह मानदेय दे रही है।
इन सहायकों को अभी तक मानदेय भी नहीं बढ़ा है। अनुबंध में लाने की कोई ठोस नीति सरकार ने अभी तक नहीं बनाई है। ये सहायक वर्ष 2010 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पंजाब में पशु फार्मासिस्टों को पशु निरीक्षक लगाया जा रहा है, परंतु हिमाचल में चीफ फार्मासिस्ट के बाद कोई पदोन्नति नहीं दी जा रही।
क्या कहते हैं महासंघ महासचिव
प्रदेश पशुपालन विभाग वेटरनेरी फार्मासिस्ट कर्मचारी महासंघ के महासचिव जेके ठाकुर ने कहा कि पशुपालन विभाग में फार्मासिस्टों को चीफ फार्मासिस्ट के बाद कोई पदोन्नति नहीं दी जा रही, जबकि पंजाब में पशु निरीक्षकों तक पदोन्नति दी जाती है।
हिमाचल के फार्मासिस्टों को सिर्फ चीफ फार्मासिस्ट तक पदोन्नति मिल रही है। पंचायतों में तैनात पशु चिकित्सा सहायकों को आठ साल से सात हजार मानदेय दिया जा रहा है। इन्हें न तो अनुबंध में लाया गया है और न रेगुलर करने की कोई ठोस नीति बनाई है। ऐसे करीब 1272 सहायक प्रभावित हैं।