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मोदी सरकार ने हिमाचल को दिया बड़ा झटका

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भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) में मिलने वाली सब्सिडी में कटौती कर दी है। अब प्रोजेक्ट कास्ट की केवल 25 फीसदी सब्सिडी ही मिलेगी। पहले यह 50 फीसदी मिलती थी। इससे हिमाचल के किसानों-बागवानों को जोरदार झटका लगा है। हिमाचल में यह सब्सिडी कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन आदि विभागों के माध्यम से दी जाती है।
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कृषि मंत्रालय के कृषि एवं सहकारिता विभाग की आरकेवीवाई सेल के अवर सचिव वीके श्रीवास्तव ने इस संबंध में हाल ही में एक पत्र (एफ नं. 9-1/2013-आरकेवीवाई) हिमाचल सरकार को भेजा है। इसमें साफ किया गया है कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की संशोधित गाइडलाइन 2014 के मुताबिक गैर सरकारी क्षेत्र में कुल परियोजना लागत की 25 फीसदी सब्सिडी देय होगी। किसानों और बागवानों के व्यक्तिगत प्रोजेक्ट भी गैर सरकारी क्षेत्र में ही आते हैं।

सरकारी, अर्द्ध सरकारी क्षेत्र को 100 फीसदी सब्सिडी

सरकारी, सरकार से पूर्ण वित्त पोषित अर्द्ध सरकारी संगठनों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, पंचायती राज संस्थानों, प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी को 100 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। यानी इन क्षेत्रों में प्रोजेक्ट कास्ट का 100 फीसदी खर्च इसी योजना से उठाया जाएगा।

इस तरह के प्रोजेक्टों में मिलती है सब्सिडी
नर्सरीज, टिश्यू कल्चर लैब, कम्युनिटी टैंक, फार्म पोंड, आरसीसी लाइनिंग, पाली ग्रीन हाउस, ड्रिप एंड स्प्रिंकलर इरीगेशन, वर्मी कंपोस्ट यूनिट, सीए स्टोर, चैक डैम, प्रोटेक्शन वॉल, बायो कंट्रोल एजेंट्स लैब, स्टेट पेस्टिसाइड्स टेस्टिंग लैब, सॉयल टेस्टिंग लैब, फर्टिलाइजर्स कंट्रोल लैब, ब्रीडिंग फार्म, वैक्सीनेशन प्रोडक्शन यूनिट, पशु एंबुलेंस, दुग्ध एकत्रीकरण केंद्र, दुग्ध अभिशीतन यूनिट, फिश पोंड, प्याज भंडारण गोदाम, सीड टेस्टिंग लैब्स, बीज विधायन सुविधा और फील्ड चैनल आदि।

शिमला पहुंचने पर नई गाइडलाइन देखूंगा। सब्सिडी में अगर कटौती हुई है तो इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
- सुजान सिंह पठानिया, कृषि मंत्री, हिमाचल

52 करोड़ कम मिले एनएचएम बजट में

केंद्र सरकार ने हिमाचल को दूसरा झटका नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के बजट में दिया है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र ने हिमाचल को एनएचएम के तहत 261.31 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। जबकि प्रदेश सरकार ने एनएचएम के लिए 313 करोड़ रुपये की मांग की थी। एनएचएम के तहत केंद्र की ओर से अभी तक हिमाचल प्रदेश को 100 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। 161 करोड़ रुपये अगले छह माह के भीतर मिलने हैं। पिछले साल हिमाचल प्रदेश को 241 करोड़ रुपये एनएचएम के तहत मिले थे।

हालांकि इस बार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 20 करोड़ रुपये का बजट बढ़ाकर 260 करोड़ रुपये स्वीकृत किया है। लेकिन यह बजट प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए नाकाफी है। सरकार की ओर से जो पीआईपी भेजी गई थी, उसके मुकाबले तकरीबन 50 करोड़ रुपये से कम बजट आवंटित किया गया है।
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अस्पतालों के मद में बजट कम

मंडी, कांगड़ा और केएनएच शिमला में शिशु एवं मातृ केयर सेंटर बनना है। इसके लिए एनएचएम के तहत इस वित्तीय वर्ष में केंद्र ने बजट स्वीकृत नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल केंद्र की ओर से जो बजट जारी किया गया था, उसे ही प्रदेश स्वास्थ्य महकमा की ओर से खर्च नहीं किया गया है। ऐसे में तकरीबन 10 करोड़ रुपये का बजट एनएचएम से काट दिया गया है।

एनएचएम के तहत 20 करोड़ रुपये का बजट बढ़ा है। 14 अक्तूबर को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पीआईपी स्वीकृत होने का आदेश मिला है। इसका विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है। यह प्रदेश के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। इससे मुश्किल हो सकती है।
- हंस राज शर्मा, निदेशक नेशनल हेल्थ मिशन, हिमाचल प्रदेश
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