फार्मा सेक्टर के लिए बजट मिला-जुला रहा है। एसएमई को तरजीह दी गई है। पुरानी स्कीमों की अवधि बढ़ाकर उद्योगपितयों को राहत दी गई है, लेकिन हिमाचल में एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब होने के बावजूद फार्मा संचालकों को निराशा हाथ लगी है। पहाड़ी राज्यों के लिए इन्वेस्टमेंट स्कीम 2022 में समाप्त हो रही है, इसे नहीं बढ़ाया गया। बल्क ड्रग फार्मा पार्क की ऊना के लिए घोषणा भी नहीं की गई है।
पुरानी योजनाओं की अवधि बढ़ाने का स्वागत
एचडीएमए के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि बजट में इमरजेंसी क्रेडिट लोन गारंटी स्कीम की अवधि बढ़ाने, कुछ केमिकल के आयात पर कस्टम ड्यूटी कम करने, दो वर्ष के दौरान इन्कम टैक्स की रिटर्न में सुधार करने, नए उद्योग लगाने पर आयकर में छूट देना स्वागत योग्य है। लेकिन प्रदेश के दवा निर्माताओं को इन्वेस्टमेंट स्कीम की अवधि बढ़ाने व बल्क ड्रग पार्क ऊना के लिए घोषणा न करने पर मायूस होना पड़ा है।
बल्क ड्रग क्लस्टर तैयार होने से चीन पर निर्भरता होगी कम
फेडरेशन ऑफ इंडिया के हिमाचल इकाई के उपाध्यक्ष सुमित सिंगला ने कहा कि सरकार ने खाली जमीन पर क्लस्टर के रूप में बल्क पार्क खोलने की घोषणा से दवा निर्माताओं की चीन पर निर्भरता कम हो जाएगी। 53 क्रिटिकल ड्रग तैयार करने के लिए छह हजार 190 करोड़ की घोषणा की गई है। यह प्रोजेक्ट 8 साल में पूरा होगा। इससे भी चीन पर दवा निर्माताओं की निर्भरता कम होगी। कस्टम ड्यूटी कम करने से सामान के रेट कम होंगे, जिससे आम लोगों को फायदा होगा।
करों में छूट न देने से मध्य वर्ग के लोग मायूस
भारत उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने कहा कि मध्य वर्गीय लोगों को कर में कोई छूट नहीं दी गई है, जिससे लोगों को इस बजट से निराशा हाथ लगी है। सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए बजट में विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।
दवाओं को जीएसटी के एक स्लैब में नहीं रखा
दवा विक्रेता सचिन बैंसल ने कहा कि बजट से दवा विक्रेताओं को निराशा हाथ लगी है। सभी दवाइयों को एक स्लैब में पांच फीसदी जीएसटी लाने की उम्मीद थी लेकिन बजट में यथावत रखा गया। दवाइयों के लिए जीएसटी तीन प्रकार से लिया जाता है। जीवन रक्षक दवाइयों पर पांच फीसदी, सामान्य दवाइयों पर 12 तथा फूड सप्लीमेंट पर 18 फीसदी जीएसटी है। लेकिन हर दवाई जीवन रक्षक होती है इसलिए इसे पांच फीसदी वाले स्लैब में रखने की मांग की थी।