नगर निगम को डिफाल्टरों से पांच करोड़ 71 लाख रुपये वसूलना है। डिफाल्टरों में पर्यटन विभाग, एचपीएमसी, आबकारी विभाग, शहर के कई शराब ठेके और कारोबारी शामिल हैं। इन सबका अब बिजली और पानी कट जाएगा।
यदि कार्रवाई से पहले यह पैसा जमा करवा देते हैं तो कार्रवाई से बच जाएंगे। डिफाल्टरों की सूची में बिजली बोर्ड खुद भी डिफाल्टर है। महकमे से एक करोड़ से अधिक की किराया राशि निगम को वसूलनी है।
नगर निगम ने बोर्ड को इस बारे में नोटिस जारी किया था। लेकिन पैसा जमा नहीं हुआ। नगर निगम को भी बिजली बोर्ड के लाखों रुपये देने हैं। अब दोनों महकमों में तय हुआ है कि निगम की देनदारी इसी किराये से काटी जाए।
नोटिस के बावजूद किराया न चुकाने वालों में नगर निगम के अपने कर्मचारी भी शामिल हैं। अफसरों के पास तैनात यह कर्मचारी अहम पदों पर तैनात हैं लेकिन नोटिस का इन पर कोई असर नहीं हुआ।
इनमें एक कर्मचारी संयुक्त आयुक्त कार्यालय में तैनात हैं। इसकी मेफील्ड के पास दुकान हैं जिसका करीब एक लाख रुपये किराया निगम के खाते में जमा होना है।
यह दुकान पहले कर्मचारी के पिता के नाम थी जो अब कर्मचारी की पत्नी के नाम से दर्ज है। इसके अलावा एपी शाखा में तैनात एक कर्मचारी को भी किराये के करीब ढाई लाख रुपये जमा कराने हैं।
इस कर्मचारी की समरहिल में दुकान है। यह दुकान कर्मचारी की मां के नाम है। नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि सभी डिफाल्टरों पर कार्रवाई होगी। फिर चाहे कारोबारी हो या एमसी के अपने कर्मचारी।