भाजपा नेता एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पहले हालीलॉज स्थित प्लाट बेचा और बाद में सत्ता के बल पर इस जमीन को एक्वायर कर दिया।
अरुण धूमल ने प्रेसवार्ता में सीएम पर आरोप लगाया कि 22 अक्तूबर, 1974 में हालीलॉज स्थित 1341 स्क्वेयर मीटर जमीन 5 हजार रुपये में बेच दी। हिमाचल में जब 2003 में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तो जमीन खरीदने वाले लोगों को यहां भवन बनाने की अनुमति नहीं दी।
वर्ष 2007 में सत्ता से जाते-जाते सरकार ने इस जमीन पर पेड़ लगाने का हवाला देते हुए इसे एक्वायर कर दिया जबकि मौके पर कोई पेड़ नहीं लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विक्रमादित्य सिंह को हालीलॉज स्थित गेस्ट हाउस बनाने की अनुमति दे दी जबकि इन लोगों को घर बनाने की अनुमति नहीं दी गई।
वीरभद्र चाहते थे कि उनके घर के सामने कोई दूसरा घर न बने। मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं। डेढ़ साल पहले वीरभद्र के कारनामों को उन्होंने उजागर किया था। आज वही बात सच साबित होकर जनता के सामने है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्ज में डूबी है। कर्ज चुकाने के लिए भी लोन लेना पड़ रहा है। बीते तीन साल से हिमाचल में विकास ठप है। सरकार लोगों के साथ विश्वासघात कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कारनामों पर वे पूरी किताब लिख सकते हैं।