अदाणी समूह ने मंगलवार को बयान जारी किया कि एसीसी और अंबुजा से प्रदेश में सीमेंट ढुलाई का परिवहन खर्च ज्यादा है और इसका कारण स्थानीय ट्रक यूनियनों का एकाधिकार है। यहां पर देश के किसी भी कोने के ट्रक ऑपरेटर को माल ढुलाई की अनुमति होनी चाहिए ताकि कंपनी का परिवहन खर्च भी कम हो और लोगों को सीमेंट भी सस्ता मिले। इस बयान के बाद दी बिलासपुर जिला परिवहन सहकारी सभा बरमाणा (बीडीटीएस) और अदाणी समूह आमने-सामने आ गए हैं। बीडीटीएस के पदाधिकारियों का कहना है कि अदाणी देश के अन्य राज्यों की तरह हिमाचल में भी तानाशाही रवैये से व्यापार कर प्रदेश की ही जनता को सड़क पर लाना चाहता है। लेकिन यह जिले के हजारों परिवारों की रोजी रोटी से जुड़ा मसला है। अगर अदाणी समूह ने यहां पर बाहरी राज्यों से ट्रक लाकर माल ढुलाई के बारे में सोचा तो इसका खामियाजा भी उसे भुगतना होगा।
बीडीटीएस के प्रधान जीत राम गौतम ने कहा कि अदाणी की मनमानी हिमाचल में नहीं चलेगी। कहा कि एसीसी सीमेंट फैक्ट्री से माल ढुलाई का कार्य स्थानीय ट्रक ऑपरेटर ही करते आए हैं और स्थानीय ट्रक ऑपरेटर ही करेंगे। वहीं, बीडीटीएस के प्रधान पद के दावेदार और वर्तमान में एक बीडीटीएस के सदस्य राकेश कुमार रॉकी ने कहा कि बरमाणा सीमेंट फैक्ट्री के लिए लोगों के घर और जमीनें उजड़ी हैं। जिले के लोग हर दिन पर्यावरण प्रदूषण से बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ट्रैफिक की वजह से यहां की जनता परेशान होती है तो एसीसी से होने वाले कारोबार पर भी यहीं के लोगों का हक है। बीडीटीएस के वरिष्ठ सदस्य लेखराम वर्मा ने कहा कि अदाणी भूल कर भी बरमाणा में बाहरी ट्रकों को लाने के बारे में विचार नहीं करें। कहा कि ऑपरेटरों के हितों की लड़ाई के लिए वे किसी भी हद तक जाएंगे। अगर फैक्ट्री में बाहर से ट्रक आए तो साल 1984 को दोहराया जाएगा और बाहरी ट्रकों की राख भी यहां पर नहीं मिलेगी। कहा कि जिले का 70 फीसदी रोजगार ट्रकों पर निर्भर है। इसके साथ अदाणी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।