सिरमौर जिले के रेणुका और शिलाई विधानसभा क्षेत्रों की कई पंचायतों में प्रधान पद के प्रत्याशी की जीत का दावा उसकी धाम से लग जाता है। प्रधान पद का उम्मीदवार एवं रसूखदार प्रत्याशी अपने घर में पंचायत के लोगों को धाम देता है। इसमें कच्ची और पक्की शराब के अलावा बकरे का मीट परोसा जाता है।
उम्मीदवार मतदाताओं को अपने घर आमंत्रित करता है। धाम के दौरान उपस्थित लोगों से प्रत्याशी अंदाजा लगाता कि उसे इस बार जीत मिलेगी या हार। पंचायत के कुल वोटर में से ज्यादातर उसके घर में धाम खाने पहुंचे तो समझो कि लोग उसके पक्ष में हैं। यदि धाम में वोटरों की संख्या कम रही तो माना जाता है कि नहीं आने वाले वोटर उसके पक्ष में मतदान नहीं करेंगे।
संगड़ाह, नौहराधार, हरिपुरधार, रोनहाट, शिलाई, सतौन, कमरऊ और कफोटा आदि क्षेत्रों में प्रधान की धाम काफी प्रसिद्ध है। प्रधान पद का उम्मीदवार पंफलेट, पोस्टर, बैनर, वाहनों से प्रचार की बजाय शराब और बकरे खरीदने पर मोटी रकम लगाता है।
अपेक्षाकृत धाम के दौरान पंचायत के लोगों की संख्या थोड़ी कम रही तो वह डोर-टू-डोर प्रचार तेज कर देता है। यदि धाम में रिकॉर्ड तोड़ संख्या रही तो पंचायत का दूसरा उम्मीदवार भी यह मान लेता है कि धाम देने वाले रसूख उम्मीदवार की जीत तय है।
धारटीधार एवं सैनधार में प्रचार पर जोर- शिलाई विधानसभा क्षेत्र की 29 पंचायतों में लाधी महल, जेलभोज, शिलाई एवं रेणुका विधानसभा क्षेत्र की 58 पंचायतों में बकरों एवं शराब की धाम का जबरदस्त प्रचलन है। धारटीधार एवं सैनधार क्षेत्र की 100 से अधिक पंचायतों में प्रधान पद के उम्मीदवार धाम देने की बजाय डोर-टू-डोर प्रचार में अधिक विश्वास रखते हैं।