मन्नत पूरी होने पर सरयोलसर झील में लोग जूते उतारकर जाते हैं और पवित्र जल पीते हैं। झील में माता की आराधना धूप, मुद्रा और पुष्प चढ़ाकर की जाती है। सैलानियों के जूते पहनकर जम गई झील की परत पर पहुंचने पर मंदिर कमेटी ने नाराजगी जताई है।
समुद्रतल से 10500 फीट की ऊंचाई पर माइनस तापमान में जम गई माता बूढ़ी नागिन की पवित्र सरयोलसर झील के बीचोंबीच सैलानी जान जोखिम में डालकर घुस गए। इस दौरान अगर झील की परत टूट जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। माना जाता है माता के आदेश के बिना कोई भी इस पवित्र झील के अंदर नहीं जाता है, लेकिन सैलानी जूतों के साथ ही पहुंच गए। इससे देव परंपरा भी टूटी है। इसको लेकर मंदिर कमेटी सख्त हो गई है।
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मन्नत पूरी होने पर सरयोलसर झील में लोग जूते उतारकर जाते हैं और पवित्र जल पीते हैं। झील में माता की आराधना धूप, मुद्रा और पुष्प चढ़ाकर की जाती है। सैलानियों के जूते पहनकर जम गई झील की परत पर पहुंचने पर मंदिर कमेटी ने नाराजगी जताई है।
सूचना मिलते ही बूढ़ी नागिन मंदिर कमेटी सोमवार को सरयोलसर पहुंची और सैलानियों और अन्य लोगों से पवित्र झील में न जाने का आग्रह किया है। मंदिर कमेटी के कारदार भागे राम ने बताया कि अगर कोई सैलानी या व्यक्ति झील में जाता है तो कमेटी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। कड़ाके की ठंड में झील जम गई है। इसकी परत कभी भी टूट सकती है। इससे बड़ा हादसा हो सकता है।
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सैलानियों को देव संस्कृति से अवगत करवा जरूरी
बंजार के सोझा घाटी के गंगेराम, सुरेश यादव और सुनील ने बताया कि बढ़ते पर्यटन के साथ सभी लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को पर्यटकों को यहां के रीति-रिवाजों, देव समाज और संस्कृति के बारे में बताना चाहिए। सैलानियों के चलते धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। उधर, एसडीएम बंजार हेम चंद वर्मा ने बताया कि ऐसे सैलानियों के खिलाफ प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा।