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ऊना: धर्म संसद में ली खून के आखिरी कतरे तक हिंदुत्व की रक्षा के लिए शपथ

Mon, 18 Apr 2022 07:12 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मुबारिकपुर (ऊना)

सार

ऊना जिले के मुबारिकपुर में धर्म संसद के दूसरे दिन सोमवार को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने कहा कि खून के आखिरी कतरे तक हिंदुत्व और परिवार की रक्षा करते रहेंगे। उन्होंने धर्म संसद में उपस्थित सभी लोगों को इसकी शपथ दिलवाई। 
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ऊना में धर्म संसद महामंडलेश्वर व संत। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के मुबारिकपुर में धर्म संसद के दूसरे दिन सोमवार को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने कहा कि खून के आखिरी कतरे तक हिंदुत्व और परिवार की रक्षा करते रहेंगे। उन्होंने धर्म संसद में उपस्थित सभी लोगों को इसकी शपथ दिलवाई। सोमवार को एहतियातन पुलिस अधिकारी ने आयोजन स्थल पहुंचकर जायजा लिया। पुलिस फोर्स अंब में ही स्टैंड बाय पर रही। मीडियाकर्मियों से बातचीत में महामंडलेश्वर ने उदाहरण देते हुए खुद को हिंदू समाज को खतरे से आगाह करने वाला कुत्ता बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेंगे। इनके सम्मान के लिए मर मिटना पड़े तो यह भी करेंगे।

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देश में हिंदुओं की संख्या घटती जा रही है। इस पर चिंतन जरूरी है। हर तरफ से हिंदू खतरे में है। सुनने वाला कोई नहीं है। हिंदू समाज के उत्थान के लिए उठने वाली आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है।  उधर, धर्म संसद के आयोजक यति सत्देवानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म संसद में केवल सनातन धर्म की गतिविधियों पर चर्चा और चिंतन किया जा रहा है। न तो भीड़ इकट्ठा की गई है न ही कोई व्यक्ति हथियार लेकर आया है। केवल सनातन धर्म की सत्यता के प्रचार को लेकर मंथन किया जा रहा है।

निगरानी के मिले हैं आदेश : एसपी
पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर ने बताया कि मुबारिकपुर में हो रही धर्म संसद को लेकर पुलिस को निगरानी के निर्देश मिले हैं, जिससे किसी प्रकार की असामाजिक गतिविधि या भड़काऊ भाषण आदि न हो। अभी तक पुलिस को किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है। 
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बच्चों को शस्त्र विद्या सिखाने की जरूरत : सर्वजीत गिरी
सर्वजीत गिरी महाराज ने कहा कि बच्चों को शस्त्र विद्या सिखाने की जरूरत है। बहू-बेटियों के हाथों में हथियार होंगे, तभी वे सुरक्षित होंगी। वर्तमान स्थिति में गुरुकुल खुलने चाहिए और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देनी चाहिए। स्वामी अमृतानंद ने कहा कि हम खतरे में हैं, यह कहने से कोई समाधान नहीं निकल रहा है। अधर्म के विनाश की बात आती है तो किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं की जाती है। 

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