सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में घपला करने वालों की शामत आने वाली है। सरकार ने अधिसूचना जारी कर प्रारंभिक शिक्षा विभाग के जिला उपनिदेशकों को मिड-डे मील से जुड़े मामलों की जांच को शिकायत निवारण अफसर नियुक्त किया है। इन्हें एक महीने में मिड-डे मील की शिकायतें निपटाने के निर्देश दिए हैं।
अगर उपनिदेशक देरी करते हैं तो निदेशक मामले की जांच करेंगे। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक 5.30 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। मिड-डे मील योजना में बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल में उपलब्ध करवाया जाता है। अधिसूचना के मुताबिक अब बच्चों को स्कूलों में गंदा खाना देने, कम और देरी से खाना देने के मामलों की शिकायत आसानी से की जा सकेगी। हिंदी या अंग्रेजी भाषा में शिकायत पत्र जिला उपनिदेशकों को दे सकेंगे। वे शिकायतों की जांच में आनाकानी नहीं कर सकेंगे।
इन्हें सरकार ने जिला शिकायत निवारण अफसर नियुक्त किया है। शिकायत पर जिला उपनिदेशक को फील्ड से रिपोर्ट जुटानी होगी। एक महीने में मामले की जांच करनी होगी। शिकायत के निवारण को सुझाव भी देने होंगे। एक माह में जांच पूरी नहीं होने पर उपनिदेशक को कारण बताना होगा। मिड-डे मील में गुणवत्ता लाने को सरकार ने व्यवस्था की है।