आज जो लोग बुद्ध विहार आए हैं या विश्व में जो लोग जब दलाई लामा का नाम सुनते हैं तो वे मानते हैं कि अवलोकितेश्वर के कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। दलाई लामा ने कहा कि बचपन से ही 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर में श्रद्धा रखता हूं। जब भी बौद्ध चित्त या शून्यता का अभ्यास अवलोकितेश्वर की तरह करता हूं तो मैं उनको अपने करीब मानता हूं। शुरू से ही अवलोकितेश्वर का अभ्यास किया और उनकी प्रार्थना की है। मैं मानता हूं कि 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर के जो अभ्यास हैं, वह बाकी अभ्यासों से हटकर हैं।
प्रार्थना के दौरान दलाई लामा ने 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर के चित्र का पूरा वर्णन किया और उनके हर हिस्से के बारे में वहां मौजूद अनुयायियों को बताया। दलाई लामा ने कहा कि बचपन में उनकी माता कहती थीं कि हमारे अवलोकितेश्वर- हमारे अवलोकितेश्वर, तब से वह मन के बहुत नजदीक हैं। उन्होंने कहा कि अपने और दूसरों के हित के साथ अंत के समय में भी बौद्ध चित्त का अभ्यास करना चाहिए। पाप को दूर के लिए लिए भी बौद्ध चित्त का अभ्यास जरूरी है। हर किसी व्यक्ति में यह भावना होनी चाहिए कि जब भी बौद्ध चित्त का अभ्यास करें तो उससे हर किसी जीव का हित होना चाहिए। प्रार्थना के अंत में दलाई लामा ने सभी को आशीर्वाद दिया।