शिमला। आईजीएमसी के वार्डों में मरीजों को ऑक्सीजन के प्रेशर की कमी नहीं सताएगी। अस्पताल के आईसोलेशन और मेडिसन वार्ड में प्लांट से डायरेक्ट आने वाली पाइप लाइनों की जांच आईआईटी मंडी की टीम ने की है। अब ये टीम आकलन कर रही है कि कहां पर ऑक्सीजन का प्रेशर टूट रहा है। जांच के बाद यह टीम बुधवार को आईजीएमसी प्रबंधन को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। आईजीएमसी के कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
आईआईटी मंडी से दो विशेषज्ञ ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम होने की जांच को लेकर अस्पताल आए थे। इस टीम ने प्लांट से लेकर आने वाली पाइप लाइनों की जांच की है। मेडिसन वार्ड और आईसोलेशन के अलावा अस्पताल के अन्य वार्डों में भी टीम ने दौरा किया है। बताया जा रहा है प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई पाइप लाइन के जरिये पूरे प्रेशर में भेजी जाती थी, लेकिन जब आपात स्थिति में मरीजों को अतिरिक्त ऑक्सीजन प्रेशर की जरूरत पड़ती थी तो ये नहीं मिल पाती थी। जबकि प्लांट से बताया जाता था कि वार्डों को पूरी क्षमता के साथ सप्लाई भेजी जा रही है। दूसरी लहर में ये समस्या अधिक हुई है। ऐसे में संभावित तीसरी लहर को देखते हुए आईजीएमसी पहले ही सतर्क हो गया है।
आईजीएमसी के आईसोलेशन वार्ड में कोरोना मरीजों के लिए 80 से 90 बिस्तरों की व्यवस्था है। जबकि दूसरी ओर मेकशिफ्ट वार्ड में 18 बिस्तर मरीजों के लिए उपलब्ध है। इसके अलावा वीआईपी के अलग से अतिरिक्त व्यवस्था यहां की गई है।