मुख्यातिथि एचके गुप्ता ने कहा कि हिमाचल भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आता है। यहां पर समय-समय पर आपदा प्रबंधन की ओर से स्कूल, कॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों में मॉकड्रिल का आयोजन किया जाता है।
आपदा आने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है, लेकिन किसी भी संस्थान, शहर में आपदा आने पर कहां जाना है, ऐसे सुरक्षित स्थान चिह्नित ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि आपदा आने से पहले सभी को सुरक्षित स्थानों की जानकारी होना जरूरी है। इस मौके पर उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार, डीसी राणा, सीयू के प्रो वाइस चांसलर एचआर शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रतिनिधि और देश के कई आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ मौजूद रहे।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने कहा कि सबसे पहले हमें अपने घर में आपदा प्रबंधन प्लान बनाने की जरूरत है। लोग भूकंप से बचने के लिए अपने घर की कोई योजना नहीं बनाते। हमें तय करना चाहिए कि जिला स्तर के आपदा प्रबंधन केंद्र को एक मॉडल के रूप में विकसित करें।
भूकंप रोधी बनाएंगे सीयू के सभी भवन : कुलपति
कार्यशाला में सीयू के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय, अस्पताल, स्कूल आदि के सभी भवन भूकंप रोधी हों।
1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गईं थी जानें
कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।