शिक्षा क्षेत्र की मजबूती के लिए यह भी हैं उम्मीदें
- स्कूल-कॉलेजों में आधुनिक कंप्यूटर लैब और स्मार्ट रूम तो बना दिए हैं, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के चलते इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने को विभाग को एक अभियान चलाना चाहिए।
- प्रदेश में दो-तीन किलोमीटर के दायरे में खोले गए कई स्कूलों को मर्ज कर एक क्लस्टर स्कूल बनाने की योजना को नये शैक्षणिक सत्र से लागू करना चाहिए।
- राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल और अटल आर्दश विद्यालयों का निर्माण जल्द पूरा कर विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधा वाले स्कूल मिलने चाहिए।
- बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में बदलाव कर यहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- कॉलेजों को नैक की मान्यता लेने के लिए सभी औपचारिकताएं समय से पूरी करने के लिए प्रभारियों को शिक्षित करना चाहिए।
- स्कूलों में बीते लंबे समय से कार्यरत कंप्यूटर और एसएमसी शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए सरकार को इनके लिए नीति बनानी चाहिए।
सूबे के गांवों के सरकारी स्कूलों की बदली जाए सूरत
निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में विश्वास जगाने के लिए सरकार को शिक्षकों की कमी को पूरा करना चाहिए। गांवों में स्थित स्कूलों की सूरत को बदलना चाहिए। नर्सरी-केजी कक्षा को हर सरकारी स्कूल में शुरू करना चाहिए। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की जवाबदेही को तय करने की जरूरत है। - जीवन शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षा उपनिदेशक
निजी संस्थानों पर नजर रखने को मजबूत हो विनियामक आयोग
प्रदेश में निजी क्षेत्र में चल रहे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर नजर रखने के लिए निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग को मजबूत करना चाहिए। निजी संस्थानों की फीस, मान्यता, शिक्षकों की योग्यता सहित अन्य कार्यों की निगरानी के लिए आयोग में पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए। आयोग को पर्याप्त शक्तियां भी दी जानी चाहिए। - सौरभ शर्मा, विद्यार्थी