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हिमाचल में हाशिए पर महिलाएं, सिर्फ आठ उम्मीदवार

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हिमाचल प्रदेश में आधी आबादी को संसद पहुंचाने के सभी राजनीतिक दलों के दावे हवा हो गए हैं। लोकसभा चुनाव के लिए 50 प्रत्याशियों ने नामांकन किया है।
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इसमें महज छह महिलाओं प्रत्याशियों पर भी भरोसा जताया है। बाकी 44 उम्मीदवार पुरुष हैं। भाजपा ने तो एक भी महिला पर दांव नहीं खेला है। हालांकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मंडी और हमीरपुर से दांव खेला है।

कांग्रेस, आप और समाजवादी पार्टी से एक-एक महिलाओं ने चुनावी जंग में अपनी दावेदार ठोकी है। भाजपा, बसपा, माकपा की ओर से किसी महिला ने पर्चा दाखिल नहीं किया है।
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यहां मतदान में आगे हैं महिलाएं

गणित के अनुसार नामांकन करने वालों में जहां 88 प्रतिशत पुरुष है, वहीं महज 12 प्रतिशत ही महिलाएं है। यह तब है, जबकि प्रदेश के चुनावों में मतदान करने में महिलाएं आगे रहती है। कई जिलों में तो महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है।

पंचायत चुनावों में भी 50 फीसदी आरक्षण है। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्या बेहद कम है। महिला प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वालों में मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रतिभा सिंह, हमीरपुर से आम आदमी पार्टी (आप) की प्रत्याशी कमल कांता बतरा, कांगड़ा से सपा की प्रवेश कुमारी, शिवसेना से आरती सोनी, हमीरपुर से सपा की उर्मिला शामिल हैं।

इसके अलावा कांगड़ा से कांता देवी ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामजदगी कराई है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर क्या कारण है कि महिला बहुल मतदाता वाले प्रदेश में भी महिला प्रत्याशियों को अहमियत नहीं दी जा रही है।

संपति तक का भी हक नहीं दिया जाता

प्रदेश के जिला किन्‍नौर और लाहौल स्पीति में तो महिलाओं को संपत्ति तक का हक नहीं दिया जा रहा। बेटा न होने पर बेटी की संपत्ति ताया और चाचा के बेटों को दी जाती है।

किन्नौर की रहने वाली सरोजिनी की भी तीन छोटी बहने हैं। लेकिन भाई न होने पर खुद शादी नहीं की और माता पिता की सेवा करती रही। लेकिन अब उनकी संपत्ति उसके चाचा-ताया के बेटों में बंट गई है।

भाई बिरादरों ने पूरी संपत्ति बेच दी है। अब सरोजिनी दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष कर रही है। इसी तरह के मामले जिले में दर्जनों से भी ज्यादा हैं जहां महिलाएं संपत्ति का हक न होने से लाचार हैं।

महिला वोटर ज्यादा फिर भी नहीं मिलता टिकट

पहले भी महिलाओं को टिकट देने के मामले में राजनीतिक दल कंजूसी बरतते रहे हैं। गिनी चुनी महिलाओं को ही चुनावी जंग में उतारा जाता रहा है।

एक तरह से लोकसभा चुनावों में महिला प्रत्याशियों को हाशिये पर खड़ा किया गया है। वहीं, प्रदेश में महिला मतदाता की संख्या कहीं ज्यादा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से तैयार कराई गई सूची के अनुसार हमीरपुर जिले में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले अधिक है।

यहां पुरुष मतदाता 173186 हैं, वहीं महिला मतदाताओं की संख्या 180008 हैं।
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नेताओं ने फिर मामला उठाने का किया दावा

मंडी सीट से भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि उन्हें भी प्रचार के दौरान इस परंपरा की जानकारी मिली है। किन्नौर में कई लोग इस मत में हैं कि बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में बेटों के समान भागीदारी मिलनी चाहिए।

ये केंद्र सरकार के स्तर के मसला है। इस मसले को संसद में उठाऊंगा। मंडी से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जय चंद बताते हैं कि यह बात उनके ध्यान में पहले नहीं थी।

अगर ऐसा है तो वह महिलाओं के इस अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे। समानता के इस अधिकार में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
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