ऊना/नारी। जिले में लोगों को स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं देने में सरकारें और प्रशासन नाकाम साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि जिला के सरकारी अस्पतालों में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जिले के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में बीते दो सालों से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो पाई है। इस मामले पर स्थानीय नेता मांग उठाने के अलावा कुछ भी नहीं कर पाए हैं। सरकार और विभाग के सुस्त रवैये के चलते आमजन निजी लैब मेें जाकर महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करने को मजबूर है।
गर्भवती महिलाओं को रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण सरकारी योजनाओं का भी फायदा नहीं मिल रहा है। निशुल्क होने वाले अल्ट्रासाउंड के लिए भी निजी लैब में रुपये चुकता करने पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पताल में कम दरों में होने वाले अल्ट्रासाउंड के लिए वर्तमान में मरीजों को 800 से 12 सौ रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
ऊना जिले से वर्तमान में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं तो राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष भी ऊना के रहने वाले हैं। नेता प्रतिपक्ष भी ऊना जिला से ही संबंध रखते हैं। इसके बावजूद जिला में स्वास्थ्य सुविधाओं राम भरोसे चल रही हैं लेकिन स्थानीय नेताओं में इस मामले पर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में लगी लाखों की अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। इसी तरह जिले के अंब, चिंतपूर्णी, गगरेट में भी मशीनें रेडियोलॉजिस्ट का इंतजार कर रही हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट को तैनात करने के लिए उच्च अधिकारियों से मांग की गई है। विभाग की तरफ से इस मामले में आगामी कार्यवाही की जाएगी।
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सरकार में इच्छा शक्ति की कमी : सुरेंद्र वर्मा
इस मामले पर वरिष्ठ नागरिक सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकार चाहे तो एक दिन में रेडियोलॉजिस्ट की कमी को पूरा कर सकती है लेकिन इच्छा शक्ति में कमी के चलते आज जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। यह एक गंभीर विषय है सरकार को इस पर जरूर कोई कार्रवाई करनी चाहिए।
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बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना सरकार का काम : दक्ष कुमार
समाजसेवी दक्ष कुमार ने कहा कि जिला में रेडियोलॉजिस्ट न होने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे तो करती हैं लेकिन धरातल पर लोग परेशान होकर मजबूरी में निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं।
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गर्भवती महिलाएं होती हैं सबसे अधिक परेशान: सुरजीत
ग्रहणी सुरजीत ने कहा कि जिले के सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं से सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड काफी कम दामों में हो जाता है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण निजी लैब में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं।
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सरकार जल्द करे रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती: सुनीता देवी
गृहिणी सुनिता देवी ने कहा कि जिले में अल्ट्रासाउंड करवाना अब निजी लैब पर ही निर्भर हो गया है। अगर ऐसा ही है तो सरकार बड़े अस्पताल और भवनों को किस लिए बना रही है। लोगों की इस परेशानी को हल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।