फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट के तहत 4 अगस्त तक ही फूड लाइसेंस बनेंगे। इस एक्ट के दायरे में मिड डे मील, कैंटीन, धाम और भंडारे भी शामिल हैं। यानी धाम या भंडारा बनाने वाले बोटी को भी फूड लाइसेंस बनवाना होगा।
इसके अलावा मंदिरों के बाहर प्रसाद बेचने वालों को भी लाइसेंस बनवाने होंगे। बिना लाइसेंस खाद्य पदार्थ बनाने वालों को छह माह कैद और पांच लाख तक जुर्माना हो सकता है। शिमला के धार्मिक स्थलों में हर सप्ताह भंडारों का आयोजन होता है।
शादियों के लिए कैटरर और बैंकट हॉल खाना बनाने का काम करते हैं। ऐसे में अब शहर के लोगों की यह जिम्मेदारी बन गई है कि भंडारों और शादियों में खाना बनाने वालों के लाइसेंस चैक करने के बाद ही वे इनकी बुकिंग करवाएं।
ठेले पर चाउमिन, चाट, गोलगप्पे आदि बेचने वाले भी फूड सेफ्टी एक्ट के दायरे में आ गए हैं। जिस स्थान के लिए उन्हें लाइसेंस दिया जाएगा, वहीं पर उन्हें काम करना होगा। इनके अलावा खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले सभी कारोबारियों को भी फूड लाइसेंस बनाने होंगे।
शहर में तीन हजार खाद्य कारोबारी
नगर निगम परिधि में तीन हजार खाद्य कारोबारी हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत इन कारोबारियों को फूड लाइसेंस बनवाने होंगे। अभी शिमला में 2200 के करीब कारोबारियों ने लाइसेंस बनवा लिए हैं।
नगर निगम क्षेत्र के तहत खाने-पीने की चीजों को बेचने वालों को फूड लाइसेंस बनवाना अनिवार्य किया गया है। हर साल इन लाइसेंसों को रिन्यू किया जाएगा। इसके तहत दुकान मालिक और वहां पर काम करने वाले कर्मियों का मेडिकल परीक्षण होगा।