सैनिक कल्याण मंत्रालय भी महेंद्र ठाकुर के पास ही है। यही नहीं, मंत्री ने संजय कुमार के सम्मान परमवीर चक्र का नाम गलत कह दिया और कहा कि उन्हें मरणोपरांत परमजीत चक्र से नवाजा गया। हैरानी की बात है कि पूर्व सैनिक होने के बावजूद मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर देश के तीन जीवित परमवीर चक्र विजेताओं के नाम भी याद नहीं रख सके।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस पर जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर का भाषण सोशल मीडिया की सुर्खियों में रहा। परमवीर चक्र विजेताओं पर भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि बिलासपुर के सपूत सूबेदार संजय कुमार जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला था। हालांकि परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार जावित हैं और अभी भी सेना में सेवाएं दे रहे हैं।गौर हो कि सैनिक कल्याण मंत्रालय भी महेंद्र ठाकुर के पास ही है। यही नहीं, मंत्री ने संजय कुमार के सम्मान परमवीर चक्र का नाम गलत कह दिया और कहा कि उन्हें मरणोपरांत परमजीत चक्र से नवाजा गया। हैरानी की बात है कि पूर्व सैनिक होने के बावजूद मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर देश के तीन जीवित परमवीर चक्र विजेताओं के नाम भी याद नहीं रख सके। इनमें दो योगिंदर सिंह और संजय कुमार कारगिल युद्ध 1999 के विजेता हैं और बाना सिंह 1987 सियाचिन के वीर हैं। मंच पर विराजमान एसपी, डीसी, विधायकों में से किसी ने भी मंत्री की गलती को सुधारने की जहमत नहीं उठाई।
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कंदराओं से शुरू हुआ था जेपी नड्डा का जीवन
गणतंत्र दिवस पर एक बार नहीं, बल्कि बार-बार मंत्री की जुबान फिसली। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का जीवन कंदराओं से शुरू हुआ। कंदराओं से निकलकर वह शिमला के रास्ते दिल्ली पहुंचे। इन्हीं शब्दों के कारण महेंद्र सिंह ठाकुर दिन भर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहे।
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मंत्री महेंद्र सिंह ने बयान को लेकर मांगी माफी
मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार के नाम के साथ मरणोपरांत शब्द का इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगी है। मंत्री ने कहा कि जुबान फिसलने के कारण गलती से मरणोपरांत शब्द उच्चारण हुआ है। मंत्री ने कहा कि संबोधन में विक्टोरिया क्रॉस विजेता कैप्टन वीर भंडारी राम और शहीद नायक किरपा राम जिन्हें बहादुरी पुरस्कार जार्ज क्रॉस प्राप्त हुआ है, का नाम लेना था। इसलिए बिना किसी गलत मंशा से संबोधन में परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार के साथ मरणोपरांत का उच्चारण हो गया। उन्होंने कहा कि वह खुद सैनिक रहे हैं और सैनिकों का पूर्ण सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावना आहत हुई हो तो इसके लिए वह क्षमाप्रार्थी हैं।