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पीएम मोदी की पसंदीदा मंडयाली धाम बनाने की विधि का होगा पेटेंट, होगी जीआई टैगिंग

Tue, 07 Sep 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, मंडी

सार

क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान फॉर न्यूट्रीशिनियल डिसऑर्डर मंडी अपने शोध में यह खुलासा कर चुका है। मंडयाली धाम बनाने की विधि का अब पेटेंट के साथ उसकी जीआई टैगिंग होगी। मंडयाली धाम में शुरुआत मीठे बदाणा से होती है। 
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पीएम मोदी की पसंदीदा मंडयाली धाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मंडयाली धाम के कायल हैं, वह औषधीय गुणों से भरपूर आयुर्वेदिक आहार है। धाम पकाने और परोसने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। टौर के हरे पत्ते से बनी पत्तलों में परोसने पर फूड वैल्यू बढ़ती है। जिस क्रम में धाम को परोसा जाता है, उससे खाना शुरू से अंत तक संतुलित रखता है। क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान फॉर न्यूट्रीशिनियल डिसऑर्डर मंडी अपने शोध में यह खुलासा कर चुका है। मंडयाली धाम बनाने की विधि का अब पेटेंट के साथ उसकी जीआई टैगिंग होगी। मंडयाली धाम में शुरुआत मीठे बदाणा से होती है। आयुर्वेद के अनुसार खाने के बाद मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है, जिससे खाने के बाद पेट में जलन या एसिडिटी नहीं होती है। उसके बाद सेपू बड़ी, कद्दू खट्टा, कोल का खट्टा, दाल और झोल खाने को शुरू से अंत तक संतुलित रखता है। अंत में दिया जाने वाला दही का झोल क्लींजिंग एजेंट का काम करता है और पाचन को बढ़ाता है। 

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जब पीएम बोले, अभी भी मंडयाली धाम का स्वाद वैसा ही रहता होगा
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिला मंडी से दिल के नाते की बानगी वैक्सीन संवाद में भी देखने को मिली। मंडी के थुनाग क्षेत्र की बहलीधार ग्राम पंचायत के दयाल सिंह के साथ हुए सीधे संवाद में प्रधानमंत्री का मंडी जिले और मंडीवालों से दिली लगाव साफ झलक रहा था। अपनेपन के एहसास के जिक्र में मंडयाली धाम के स्वाद को याद करना नहीं भूले। प्रधानमंत्री बोले उनका मंडी आना जाना रहा है। मंडी वालों से बात करना अच्छा लगता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे मंडियाली धाम ‘मिस’ करते हैं। वह मन में मंडी प्रवास की अपनी पुरानी यादों को संजोये हुए बोले-‘अब भी मंडयाली धाम का स्वाद वैसा ही रहता होगा। ’

पत्तल और हाथ से धाम खाने में मिलता है लाभ
कुछ वर्ष पहले अपनी टीम के साथ इसपर शोध करने वाले सेवानिवृत्त सहायक निदेशक आयुर्वेदा डॉ. ओम शर्मा के अनुसार फूड वैल्यू को देखते हुए मंडयाली धाम आप में एक अनूठा आहार है और इसके परोसने का तरीका भी अनूठा है। हरी पत्तलों और हाथ से धाम खाने का जो लाभ शरीर को मिलता है, वह प्लास्टिक से बनी प्लेटों और चम्मच से खाने से नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि शोध पत्र जनरल इंटरनेशनल जनरल ऑफ एडवांस रिसर्च में प्रकाशित हो चुका है। 
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- मंडयाली धाम की जीआई टैगिंग होगी। इसके अलावा धाम बनाने की विधि का पेटेंटहोगा। शोधकर्ताओं से संपर्क साधा जाएगा। मंडयाली धाम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रयास किया जाएगा। 
- अरिंदम चौधरी, डीसी मंडी

यह है जीआई टैग
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के मुताबिक भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है। ऐसा उत्पाद जिसकी विशेषता या फिर प्रतिष्ठा मुख्य रूप से प्राकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है। भारत में संसद की तरफ से 1999 में पंजीकरण और संरक्षण अधिनियम के तहत  माल के भौगोलिक संकेत लागू किया था, इस आधार पर भारत के किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य को दे दिया जाता है। यह टैग किसी खास भौगोलिक परिस्थिति में पाई जाने वाली या फिर तैयार की जाने वाली वस्तुओं के दूसरे स्थानों पर गैर-कानूनी प्रयोग को रोकना है। भारत को अब तक 365 जीआई टैग्स मिल चुके हैं।

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