हिमाचल में उद्योगों के लिए आवंटित जमीन पर ही कई लोगों ने घर बना लिए हैं। कई प्लॉटों पर वर्षों बाद भी जहां उद्योग नहीं लगे हैं, वहीं कई जगह उद्योगों के नाम पर रिहाइशें बना दी गई हैं। शिमला, सोलन समेत विभिन्न जिलों से सरकार के पास ऐसी शिकायतें पहुंची हैं।
इस मामले पर वीरवार को कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा हुई है। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उद्योग विभाग से तमाम औद्योगिक प्लाटों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार उद्योग लगाने के लिए प्लॉट उपलब्ध करवाती है।
आवंटित प्लॉटों पर उद्योगपति को पांच साल के भीतर उद्योग स्थापित करना होता है। उद्योगों के लिए आवंटित भूमि पर कुछ और नहीं बनाया जा सकता। उद्योग के साथ कामगारों के रहने के लिए शेड बनाने को भी सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।