बता दें कि याचिकाकर्ता एक सीनियर असिस्टेंट पद पर हैं। उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पीजीआई से कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए अनुमानित खर्च प्रस्तुत किया था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन और हिमाचल प्रदेश के निदेशक स्वास्थ्य सेवा ने नियमों की गलत व्याख्या और अधिसूचना की अनुपलब्धता के कारण निर्धारित सीमा से अधिक राशि स्वीकृत कर दी।इसके अलावा स्वीकृत राशि सीधे पीजीआई, चंडीगढ़ में ई-वितरण के माध्यम से जमा की गई थी और याचिकाकर्ता ने अपनी जेब से 4,06,875 का अतिरिक्त भुगतान भी किया था।
अदालत ने यह फैसला एक क्लास-तीन कर्मचारी की याचिका पर पारित किया है। याचिकाकर्ता के बेटे के कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए स्वीकृत राशि निर्धारित सीमा से अधिक थी। राज्य सरकार ने यह राशि वसूलने के लिए 4 जुलाई, 2023 को एक नोटिस जारी किया था, जिसे कर्मचारी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने 4 जुलाई, 2023 के रिकवरी नोटिस को रद्द कर दिया। इस फैसले से क्लास-तीन और क्लास-चार कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जो ऐसे मामलों में बिना किसी गलती के वसूली के बोझ तले दब जाते थे।