क्या है मामला
- ईस्ट इंडिया होटल्स लिमिटेड (ईआईएच) और हिमाचल प्रदेश के बीच 30 अक्तूबर 1995 को होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल के निर्माण और संचालन के लिए एक संयुक्त उद्यम समझौता (जेवीए) निष्पादित किया गया था। बाद में मशोबरा रिसॉर्ट लिमिटेड (एमआरएल) नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी बनाई गई। राज्य के अनुसार ईआईएच ने समझौते का पालन नहीं किया और अवैध रूप से एमआरएल में राज्य की शेयरधारिता कम कर दी। इसके परिणामस्वरूप राज्य ने 6 मार्च 2002 को जेवीए को समाप्त कर दिया। विवाद को मध्यस्थता के लिए रखा गया और 23 जुलाई 2005 को एक निर्णय पारित किया गया।
इस निर्णय को चुनौती दी गई। 5 जनवरी 2024 को अदालत ने फैसला सुनाया कि ईआईएच निर्णय का पालन करने में विफल रहा है। परिणामस्वरूप, न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश राज्य को वाइल्डफ्लावर हॉल होटल और जेवीए के तहत आने वाली पूरी संपत्ति का कब्जा लेने का अधिकार दिया। ईआईएच को दो महीने के भीतर संपत्ति खाली करने और राज्य को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया था। इन आदेशों के खिलाफ ईआईएच ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन 20 फरवरी 2024 को उसकी विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हालांकि, ईएचआई को संपत्ति खाली करने और राज्य को कब्जा सौंपने के लिए 31 मार्च, 2025 तक का समय दिया गया था।