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Shimla: नौणी और कृषि विवि में वीसी की नियुक्ति पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने

Sat, 16 Aug 2025 02:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति की नियुक्ति के विज्ञापन नोटिस पर शनिवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू फिर अपनी-अपनी बात पुरजोर ढंग से रखते नजर आए।
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हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति की नियुक्ति के विज्ञापन नोटिस पर शनिवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू फिर अपनी-अपनी बात पुरजोर ढंग से रखते नजर आए। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में सही फैसला लिया था, वहीं सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्यपाल की बतौर चांसलर शक्तियां सांविधानिक नहीं हैं। वह उनसे मिलकर मामले का समाधान निकाल लेंगे।

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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शनिवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्य तिथि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति को लेकर लिया गया उनका फैसला सही था। कहा कि विवि के हित के लिए जो मैंने किया है, वह सही था। हाईकोर्ट की ओर से रोक लगाने पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह यह प्रदेश  की जनता पर छोड़ते हैं कि दोनों विश्वविद्यालय के लिए क्या सही है और क्या गलत है।

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कैबिनेट ने विज्ञापन वापस लेने को कहा, उसके बावजूद भी राजभवन ने बढ़ाई आवेदन की तिथि: सीएम
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्यपाल से मिलकर वह कुलपतियों की नियुक्ति के विज्ञापन मामले में समाधान निकालेंगे। सुक्खू ने कहा कि वह उनके पास जाएंगे और कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा। सुक्खू ने कहा कि विधानसभा ने राज्यपाल महोदय को चांसलर नियुक्त किया है, मगर सरकार की बात पर अमल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल सांविधानिक पद पर हैं। वह उनका सम्मान करते हैं। शनिवार को शिमला के रिज मैदान पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में सुक्खू ने कहा कि राज्यपाल के पास किस अधिकारी ने किस प्रकार से मामले को रखा, यह विषय है। राज्यपाल राज्य के विषयों पर बात करते रहते हैं। सबसे बड़ा एक्ट सुखाश्रय वाला है, जो उनके पास लंबित रहा है। विधायकों का पार्टी छोड़ने से संबंधित विधेयक भी उनके पास है। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्तियों से संबंधित विधेयक को पारित कर भेजा गया है, वह उनके पास काफी समय से लंबित रहा है।

अब आपत्तियां लगाकर वापस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि चांसलर की जो भी शक्तियां हैं, वह उन्हें राज्य विधानसभा ने ही दी हैं। जब विधानसभा ने उन्हें चांसलर नियुक्त किया तो उस स्थिति में अगर सरकार कोई बात भेजती है, तो उस पर अमल होना चाहिए। राज्य विधानसभा ने पहले यह कानूनी प्रावधान किया कि जो भी विश्वविद्यालय होंगे, उसमें चांसलर राज्यपाल होंगे। यह सांविधानिक नहीं, राज्य सरकार की दी शक्तियां हैं। अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी और तकनीकी यूनिवर्सिटी को लेकर राज्य सरकार ने राज्यपाल को चांसलर की शक्तियां नहीं दी हैं। कृषि मंत्री और कृषि सचिव ने भी राजभवन चिट्ठी भेजी थी कि चांसलर की पोस्ट होल्ड करने के बाद सरकार का विचार ऐसा है कि अभी इन पदों को विज्ञापित न किया जाए। राज्य मंत्रिमंडल ने भी यह निर्णय लिया। उसके बावजूद राजभवन ने इस विज्ञापन की तिथि को पांच दिन बढ़ा दिया। इस पर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।
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अटल हिमाचल प्रदेश को अपना घर मानते थे
राज्यपाल ने वाजपेयी को एक राजनेता, दूरदर्शी नेता और अपने पूरे कार्यकाल में सर्वोच्च नैतिक मूल्यों को बनाए रखने वाले राजनेता कहा। राज्यपाल ने कहा कि अटल हिमाचल प्रदेश को अपना घर मानते थे और सार्वजनिक जीवन में हमेशा गरिमा बनाए रखते थे। शुक्ला ने कहा कि उन्होंने सत्ता के लिए या अपनी सरकार बचाने के लिए कभी भ्रष्टाचार का सहारा नहीं लिया। आज हम उन्हें जो सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दे सकते हैं, वह है उनके ओर से दिखाए गए ईमानदारी और मूल्य आधारित राजनीति के मार्ग पर चलना। राज्यपाल ने आगे कहा कि वाजपेयी भारतीय राजनीति में एक महान हस्ती थे, जिनकी सभी दलों की ओर से प्रशंसा की जाती थी और उनकी सादगी, वाकपटुता और राजनेता कौशल के लिए पूरा देश उन्हें प्यार करता था।
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