हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद भी बने आकर्षण का केंद्र संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के गेयटी थियेटर में सोमवार से कारीगरों का मेला शुरू हो गया। इसमें देशभर से आए कारिगरों ने हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया है।
मेले में सात स्टॉल लगाए हैं। इसमें कश्मीर के स्टॉल पर कहवा और कश्मीरी मसाला टिक्की लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। कहवा चाय होती है। इसे कश्मीरी हरी चाय की पत्तियों, साबुत मसालों, नट्स और केसर के मिश्रण से तैयार किया जाता है। कहवा का ढाई सौ ग्राम का डिब्बा 320 रुपये का है। कश्मीरी मसाला टिक्की कई तरह के मसालों के मिश्रण से बनाई है। इसे खाने में मसाले की जगह डाला जाता है। इसका मूल्य 250 रुपये रखा है।
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प्रदर्शनी में पश्मीना शॉल 1,000 रुपये से 1.10 लाख रुपये तक बिक रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के महेश्वरी सिल्क सूट 3 हजार से 5 हजार रुपये तक के हैं। हैंड पेंटिंग मलवरी सिल्क साड़ी 3 हजार से 15 हजार, हैंड प्रिंट मलवरी सूट 1,500 से 5 हजार, रूबी और मोती की ज्वेलरी 300 से 15 हजार रुपये में बिक रही है। इत्र 1,100, शहद 450, केसर 450 और शिलाजीत 650 रुपये में मिल रही है।
कश्मीर के कारिगर आरिफ खान ने बताया कि प्रदर्शनी में रखी सारी चीजें घरेलू हैं। मोहम्मद आलम ने बताया कि हैंड पेंटिंग और हैंड प्रिंट से मलवरी सिल्क साड़ियां और सूट बनाने के लिए पहले प्रशिक्षण दिया जाता है। छह जून तक चलने वाले इस मेले के आयोजक सुधीर गुलेरिया ने बताया कि इस तरह की प्रदर्शनियां आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य कारीगरों को उचित मंच प्रदान करना है। गेयटी में उनकी यह तीसरी प्रदर्शनी है।